हरियाणा का गुरुग्राम जिला एक बार फिर प्रदेश की राजस्व प्रणाली में शीर्ष पर पहुंच गया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 की शुरुआत के साथ ही गुरुग्राम ने 3,875 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व देकर राज्य के कुल संग्रह में लगभग 27% की हिस्सेदारी दर्ज की है. यह आंकड़ा हरियाणा सरकार के आबकारी और कराधान विभाग के अब तक के सबसे अधिक कुल संग्रह, 14,342 करोड़ रुपये का हिस्सा है.
गुरुग्राम ने इस मामले में प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों जैसे फरीदाबाद (1,696 करोड़), सोनीपत (1,066 करोड़), रेवाड़ी (654 करोड़) और हिसार (615 करोड़) को भी पीछे छोड़ दिया है. विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता नई आबकारी नीति, पारदर्शी नीलामी और समय पर लाइसेंसिंग प्रक्रिया का परिणाम है.
आबकारी एवं कराधान आयुक्त विनय प्रताप सिंह के अनुसार, इस साल 1,194 आबकारी क्षेत्रों की नीलामी की गई और पूरे राज्य में 2,388 खुदरा शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी किए गए. हर क्षेत्र में दो-दो दुकानें आवंटित करने की नीति ने वितरण को संतुलित बनाया. उन्होंने बताया कि नीलामी इस बार पहले से अधिक पारदर्शी तरीके से और समय से पूर्व संपन्न हुई.
राज्य सरकार ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में आबकारी राजस्व में 13.25% की वृद्धि दर्ज की गई है. विभाग का कुल लक्ष्य 61,950 करोड़ रुपये था, जिसके मुकाबले 63,371 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई. इसमें से 39,153 करोड़ रुपये स्टेट जीएसटी और 12,701 करोड़ आबकारी शुल्क से आए. अनुमान है कि अगले साल 2024-25 में राज्य का कुल राजस्व 116,639 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
जहां एक ओर गुरुग्राम जैसे शहरी जिले से बड़ी कमाई हुई, वहीं ग्रामीण जिलों में भी सुधार देखने को मिला। भिवानी (23.5%), फतेहाबाद (21%), हिसार (21%), कुरुक्षेत्र (20.5%) और पानीपत (18%) में भी खपत और लाइसेंसिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. हालांकि, इस सफलता पर विवाद के बादल भी मंडरा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के वकील और अधिकार संगठन के अध्यक्ष राजीव यादव ने आरोप लगाया है कि गुरुग्राम के कई प्रीमियम आबकारी क्षेत्र आरक्षित मूल्य से कम दर पर आवंटित किए गए हैं. उन्होंने इसे मिलीभगत का नतीजा बताया और मामले की जांच की मांग की है.