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'गद्दार, हराम और न जाने क्या-क्या,' केरल में 'अपनों' से गालियां सुन रहे BJP के मुस्लिम उम्मीदवार

डॉ. अब्दुल सलाम, केरल से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हैं. मलप्पुरम संसदीय सीट से वे चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने एक जनसभा में कहा है कि उनके साथ मस्जिद और बाजारों में गलत हो रहा है.

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Dr Abdul Salam
Courtesy: Social Media

केरल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार डॉ. अब्दुल सलाम के लिए लोकसभा चुनाव की राह आसानी नहीं है. वे केरल बीजेपी के इकलौते मुस्लिम उम्मीदवार हैं, जिनके साथ हर दिन बदसलूकी हो रही है. मल्लपुरम लोकसभा सीट मुस्लिम बाहुल सीट है. यहां करीब 68.3 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. उन्होंने कहा है कि लोग उन्हें गद्दार और हराम बुला रहे हैं. ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वे बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

एक गांव में चुनाव प्रचार के दौरान वोटरों से उन्होंने अपना दर्द साझा किया है. डॉ. सलाम ने कहा है कि ईद की नमाज पर मादिन मस्जिद में उनके साथ बदसलूकी हुई है. उन्होंने कहा कि उनके साथ लोगों ने भेदभाव किया है. गद्दार और हराम बुलाए जाने की वजह से वे बहुत व्यथित हैं. मल्लपुरम संसदीय क्षेत्र पर मुस्लिम बाहुल इलाका है और यहां बीजेपी के खिलाफ जनविरोधी लहर है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. अब्दुल सलाम ने कहा, 'नमाज के बाद मस्जिद के बाहर आ गया. मैं लोगों को ईद की बधाई दे रहा था और उन लोगों ने मुझे गद्दार कहा. जो लोग मेरे आसपास थे वे चुप थे. मेरा दिल टूट गया. मैं भी मुस्लिम हूं लेकिन वे मेरे साथ सिर्फ इसलिए ऐसा कर रहे हैं क्योंकि मैंने बीजेपी ज्वॉइन की है.'

अपने ही संसदीय क्षेत्र में बुरे घिरे अब्दुल सलाम

डॉ. सलाम चर्चित एकेडमीशियन रहे हैं. वे कालीकट विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर भी रहे हैं. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर राजनीति में आए लेकिन अब उन्हें, उनके ही संसदीय क्षेत्र में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. 

संसदीय क्षेत्र में नहीं मिल रहा है लोगों का साथ

डॉ. सलाम के साथ जनसमर्थन नहीं नजर आ रहा है. उनकी रैलियों में भीड़ कम होती है. उनके साथ 20 से 25 लोग चलने वाले होते हैं. एक गांव में वे स्थानीय राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के नेता के पास पहुंचे तो महज 25 लोग वहां मौजूद थे. उनमें आधे से ज्यादा केवल महिलाएं थीं. कुछ छोटे बच्चे भी थे. 

संसदीय क्षेत्र में परेशानियां झेल रहे बीजेपी के उम्मीदवार

महिला मोर्चा के सदस्यों ने उनसे कहा कि चलिए एक कन्वेंशन में चलते हैं तो उन्होंने खराब तबीयत का बहाना बनाकर टाल दिया. वे लगातार अपने संसदीय क्षेत्र में चल रहे हैं. लेकिन उनकी सियासी राह अभी मुश्किल नजर आ रही है. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी उनके चुनाव प्रचार में उतर नहीं रहा है.