लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के संस्कारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है. लखनऊ में आयोजित अनुदेशक सम्मान समारोह एवं चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में होने वाली प्रशासनिक कार्रवाइयों पर अपनी बात रखी. उन्होंने साफ कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी बहुमुखी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें आत्म-अनुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ाना है.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के आधार पर शिक्षकों के खिलाफ होने वाली जल्दबाजी की कार्रवाईयों पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जब बच्चे स्कूल परिसर में स्वच्छता के लिए श्रमदान करते हैं, तो मीडिया और समाज में इसे गलत तरीके से पेश किया जाता है. अधिकारियों को ऐसे मामलों में शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगने के बजाय उन्हें बुलाकर सम्मानित करना चाहिए, क्योंकि वे बच्चों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं.
शिक्षकों को प्रेरित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि हमें अपने बच्चों को 'छुई-मुई' यानी कमजोर नहीं बनाना है. इसके विपरीत, उन्हें शिक्षा और उत्तम संस्कारों के माध्यम से इतना तेजवान और प्रचंड बनाना है कि कोई भी उन्हें नुकसान पहुंचाने से डरे. स्वच्छता को उनके दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए. बच्चों में सही और गलत का अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारे गुरुओं की ही है.
पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा परिषद में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि अब कोई भी बच्चा नंगे पैर स्कूल नहीं आता है. सरकार सीधे अभिभावकों के खातों में पैसे भेजकर जूते, मोजे, यूनिफॉर्म और स्वेटर की व्यवस्था कर रही है. उन्होंने नए सत्र की शुरुआत में ही किताबों की कमी को लेकर चलने वाली खबरों पर मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सब कुछ समय पर मिल जाएगा, पहले बच्चों को खेलने-कूदने और घुलने-मिलने का अवसर दें.
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में बेसिक शिक्षा परिषद के तहत लगभग एक करोड़ साठ लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जो प्रदेश और पूरे देश का सुनहरा भविष्य हैं. उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल राजनेताओं के बयानों से नहीं होती, बल्कि समाज के हर वर्ग के सामूहिक प्रयासों से संभव होती है. इस प्रगति की मजबूत नींव तैयार करने की असली जिम्मेदारी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े शिक्षकों के कंधों पर टिकी है.
अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किए गए विभिन्न सफल प्रयोगों और उनके सकारात्मक परिणामों पर बेहद प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में की गई वृद्धि को उनके समर्पण का सम्मान बताया. मुख्यमंत्री का मानना है कि जब शिक्षक बिना किसी मानसिक दबाव के काम करेंगे, तो वे ग्रामीण परिवेश के बच्चों को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती के साथ जोड़ने में सफल हो सकेंगे.