menu-icon
India Daily

मां ने खुद के लिए मौत चुनकर बच्चे को दी नई जिंदगी, प्रयागराज की इस घटना को सुनकर आपका दिल बैठ जाएगा

प्रयागराज में घर में लगी भीषण आग के दौरान मां अर्चना ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक साल के बेटे समेत तीन बच्चों को सुरक्षित बचा लिया. हालांकि खुद गंभीर रूप से झुलस गईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

KanhaiyaaZee
मां ने खुद के लिए मौत चुनकर बच्चे को दी नई जिंदगी, प्रयागराज की इस घटना को सुनकर आपका दिल बैठ जाएगा
Courtesy: Social Media

प्रयागराज: यूपी के प्रयागराज से एक दिल दहला देनेवाला मामला सामने आया है. यहां अपने बच्चे को आग से बचाने के लिए एक मां ने अपनी जान की बाजी लगा दी. मां ने अपने बच्चे की जान तो बचा ली, लेकिन वो खुद को नहीं बचा पाई. गंभीर रूप से झुलसने की वजह से उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद से जहां लोग मां की ममता की दुहाई दे रहे हैं, वही इलाके के लोगों में गहरा दुख भी देखने को मिल रहा है.

दरअसल, मामला यूपी के प्रयागराज के नैनी बाजार इलाके का है, जानकारी के मुताबिक 12 मई को संजीव केसरवानी के घर में अचानक आग लग गयी. इस घर में संजीव केसरवानी के अलावा उनके दो भाइयों का परिवार भी रहता है. नीचे बने गोदाम में राटा के समय में अचानक आग लग गई, जिसके बाद देखते ही देखते आग पुरे मकान में फ़ैल गई. 

ग्राउंड फ्लोर से टॉप फ्लोर तक पहुंची आग की लपटें

आग ने जब मकान को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया तो मकान के अंदर के लोगों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला. फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, लेकिन संकरी गली होने की वजह से फायर ब्रिगेड को घटनास्थल पर पहुँचने में काफी वक्त लग गया. इस दौरान जान बचाने के लिए परिवार घर की छत पर चला गया, लेकिन आग इतनी तेजी से फ़ैल रही थी उसकी लपटें छत तक पहुंच रही थी.

मां ने जान की बाजी लगाकर बचाई बच्चों की जान

इस भीषण अगलगी के दौरान भी संजीब केसरवानी की पत्नी अर्चना ने गजब की सूझबूझ का परिचय दिया और अपने एक साल के बच्चे को चादर में लपेटा और करीब पड़ोसी की छत की ओर उछाल दिया. वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया. अर्चना ने 13 साल और 10 साल की दोनों बेटियों को भी पड़ोसी की छत तक सुरक्षित पहुंचा दिया और अंत में अपने भतीजे को भी सुरक्षित बचा लिया. 

हालाँकि इस दौरान वो आग की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गई, जिसे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन उनकी जान नहीं बचाई सकी और अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अर्चना की मौत से जहां उनके परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है, वही इलाके के लोग भी ग़मगीन हैं. लोग उनकी बहादुरी का जिक्र भी करते हैं और रुंधे गले से उनके बच्चों की फ़िक्र भी.