नई दिल्ली: साउथ फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. कोलीवुड के जाने-माने फिल्म निर्माता, निर्देशक के राजन ने आत्महत्या कर ली है. रविवार को चेन्नई के अडयार ब्रिज से नदी में कूदकर उन्होंने जान दे दी. इस खबर के सामने आते ही पूरी तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर आगे की छानबीन शुरू कर दी है.
के राजन केवल एक फिल्म निर्माता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने तमिल सिनेमा में लेखक, निर्देशक और अभिनेता के रूप में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी थी. उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1983 में 'ब्रह्माचारिगल' फिल्म का निर्माण करके की थी. इसके बाद उन्होंने 'डबल्स', 'अवल पावम' और 'निनाईकोआथा नालिआई' जैसी कई यादगार फिल्मों को प्रोड्यूस किया, जिसने उन्हें फिल्म जगत में एक स्थापित नाम बना दिया.
निर्माण के क्षेत्र में सफल रहने के बाद उन्होंने साल 1991 में 'नम्मा ओरू मारिअम्मा' फिल्म से बतौर निर्देशक अपनी एक नई पारी शुरू की. इस फिल्म में सरतकुमार और निजालघल रवी मुख्य भूमिकाओं में थे. इसके साथ ही उन्होंने 'उनार्कीगल' जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया. एक अभिनेता के तौर पर उन्होंने अजीत कुमार की सुपरहिट फिल्म 'थुनिवू' और सेल्वाराघवन की 'बकासुरन' सहित 'माइकल राज' जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया.
तमिल सिनेमा में के राजन को उनके काम के अलावा उनकी गजब की बेबाकी और खुलकर बोलने के अंदाज के लिए हमेशा याद किया जाएगा. जहां एक तरफ फिल्म जगत के लोग अपने करियर और संबंधों को बचाने के लिए कड़वे सच पर पर्दा डालते हैं, वहीं राजन कोलीवुड के बड़े से बड़े सुपरस्टार्स का नाम लेकर उनकी गलत नीतियों पर सीधे सवाल उठाते थे. उनकी यही निडरता अक्सर मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती थी.
वे अक्सर बड़े सितारों पर आरोप लगाते थे कि वे जरूरत से ज्यादा खर्चीली और प्रयोगात्मक फिल्मों के चक्कर में निर्माताओं को भारी कर्ज के जाल में धकेल देते हैं. उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर धनुष की फिल्म 'एनाई नोकी पायम थोटा' और कार्ति की 'आयीरतिल ओरुवन' का उदाहरण देते हुए कहा था कि इन फिल्मों के बेतहाशा खर्चों ने निर्माताओं को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया था. वे फिजूलखर्ची के सख्त खिलाफ थे.
राजन ने लेडी सुपरस्टार नयनतारा और कॉमेडियन योगी बाबू जैसे बड़े कलाकारों के रवैये पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की थी. उनका स्पष्ट मानना था कि ये कलाकार फिल्मों के लिए करोड़ों की भारी-भरकम फीस तो वसूलते हैं, लेकिन जब फिल्म के प्रमोशन, ऑडियो लॉन्च या प्रेस मीट की बात आती है तो ये दूरी बना लेते हैं. वे हमेशा कहते थे कि निर्माताओं के पैसों की कद्र करना हर कलाकार की नैतिक जिम्मेदारी है.