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'लड़कियां तो झूल जाती हैं, पर लड़के...', ट्विशा केस में सास के बयान से मचा बवाल

भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने कई गंभीर दावे किए हैं. चलिए जानते हैं उन्होंने ट्विशा की मानसिक स्थिति, MTP प्रक्रिया और परिवार पर लगे आरोपों को लेकर क्या सफाई दी.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'लड़कियां तो झूल जाती हैं, पर लड़के...', ट्विशा केस में सास के बयान से मचा बवाल
Courtesy: @SamSiff and @MAHENDRA1031 x account

भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में मृतक की सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है और कई गंभीर दावे किए हैं. गिरिबाला सिंह ने कहा कि गर्भपात की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ट्विशा ने इसे रोकने की इच्छा जताई थी. हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

ट्विशा शर्मा की सास, गिरिबाला सिंह के अनुसार जब ट्विशा ने MTP प्रक्रिया का शुरुआती चरण शुरू किया तो उसने इसे वापस लेने की इच्छा जताई जो कि संभव नहीं था. 'यह हमारे परिवार के लिए बहुत खुशी का पल हो सकता था लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि सब कुछ बिखर गया. लड़कियां अक्सर ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कदम उठा लेती हैं. वे हार मानकर फांसी लगा लेती हैं लेकिन लड़के फांसी नहीं लगाते तो क्या इसका मतलब यह है कि वे अपराधी हैं?'

उन्होंने क्या किया दावा? 

उन्होंने दावा किया कि 7 मई को ट्विशा ने MTP प्रक्रिया पूरी की और उस दौरान परिवार को उसके साथ खड़े रहना पड़ा. इसके अलावा उन्होंने बताया कि उन्होंने ट्विशा की मां को भी फोन किया था ताकि वह अपनी बेटी के साथ रह सकें. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ट्विशा के माता-पिता पिछले पांच महीनों में उससे एक बार भी मिलने नहीं आए थे. 

उन्होंने कहा, 'यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. परिस्थितियां चाहे जो भी रही हों, वह हमारे परिवार का एक अभिन्न अंग थी. मैं काम से लौटती थी, उसका सिर अपनी गोद में रखती थी और उसे समझाने-बुझाने और दिलासा देने की कोशिश करती थी.' उन्होंने ट्विशा के माता-पिता से अपील की है और उनसे आग्रह किया है कि वे जो भी विरोध-प्रदर्शन या प्रदर्शन करना चाहें, बेझिझक करें लेकिन कृपया उसके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करें. उन्हें उसके पार्थिव शरीर के साथ इतनी क्रूरता का व्यवहार नहीं करना चाहिए.

कैसी है मानसिक स्थिति?

ट्विशा की मानसिक स्थिति के बारे में बात करते हुए गिरिबाला सिंह ने बताया कि उसने मनोरोग संबंधी परामर्श लिया था और उसे ऐसी दवाएं दी गई थीं जो आमतौर पर सिजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीजों को दी जाती हैं. कुछ दिनों तक वह सामान्य दिखती थी लेकिन फिर उसकी हालत बिगड़ जाती थी. उसके हाथों में कंपन जैसे लक्षण भी देखे गए थे. 

ये ऐसे संकेत थे जो संभवतः दवा छोड़ने के कारण होने वाले लक्षणों के रूप में सामने आ रहे थे. अपनी बात समाप्त करते हुए, उन्होंने दुख व्यक्त किया कि उन्होंने सब कुछ बर्बाद कर दिया है और अब उसके माता-पिता उसके अंतिम संस्कार में भी देरी कर रहे हैं. उन्होंने उनसे आग्रह किया कि यदि आप विरोध-प्रदर्शन या धरने पर बैठना चाहते हैं, तो बेझिझक करें लेकिन कम से कम उस बच्ची के पार्थिव शरीर को पंचतत्व में विलीन तो होने दें.'