नई दिल्ली: किसी की खामोशी को उसकी कमजोरी समझने की गलती न करें. पड़ोसी देश बांग्लादेश का भी यही हाल है. भारत में रह रहीं वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर लगातार वहां की नई सरकार कई खोखली धमकियां दे रही है. इस पर हसीना ने अब बेबाक जवाब दिया है. इससे बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में रहते हुए ऐसा बयान दिया है, जिसने ढाका से दिल्ली तक हलचल बढ़ा दी है. उन्होंने साफ कहा कि वह 'बहुत जल्द' बांग्लादेश लौटेंगी और देश के लोकतंत्र की लड़ाई जारी रखेंगी. उनका ये बयान भारत में 650 दिन रहने का बाद आया है.
हसीना के इस बयान को सिर्फ राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता में वापसी के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. बांग्लादेश में पहले से जारी राजनीतिक तनाव और भारत विरोधी माहौल के बीच उनका अचानक सक्रिय होना कई नए सवाल खड़े कर रहा है. विपक्षी दलों और अंतरिम सरकार पर उनके तीखे हमले ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है.
हसीना ने कहा 'वापसी का मामला किसी निश्चित तिथि या समय पर निर्भर नहीं करता. हम बांग्लादेश में लोकतांत्रिक वातावरण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक अधिकारों और कानून के शासन की बहाली सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. यह न केवल मेरी वापसी के लिए आवश्यक है, बल्कि देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा और जनता के समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है'.
उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहती हूं: मेरी अनुपस्थिति का मतलब मेरी चुप्पी नहीं है. मैं हर पल देश के लिए लड़ रही हूं, और हम राजनयिक स्तर पर, अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचों के भीतर और वैश्विक मीडिया के माध्यम से सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.'
हसीना ने कहा कि 'भारत लंबे समय से हमारा मित्र और पड़ोसी रहा है, और मुक्ति संग्राम के दौरान उसका समर्थन निर्विवाद है. 'हालांकि, हमारे देश में, भारत-विरोधी बयानबाजी लंबे समय से मुक्ति-विरोधी और वैचारिक रूप से दिवालिया समूहों के मुख्य हथियारों में से एक रही है. यूनुस की अंतरिम सरकार ने भी इस प्रथा में साथ दिया'.
उन्होंने आगे कहा कि अवामी लीग पर उसके विरोधियों द्वारा अक्सर भारत के सामने झुकने और राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध समझौते करने का आरोप लगाया जाता रहा है. हालांकि, सत्ता में अपने 18 महीनों के दौरान अंतरिम सरकार और बीएनपी दोनों ही ऐसे किसी भी राष्ट्रविरोधी समझौते का सबूत पेश नहीं कर पाई हैं.
डेढ़ साल की अशांति के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास में, भारत और बांग्लादेश वीजा सेवाओं को पूरी तरह से फिर से शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं . इंडिया एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश ने भारतीय नागरिकों के लिए सभी श्रेणियों के वीजा पहले ही फिर से शुरू कर दिए हैं, जबकि भारत धीरे-धीरे वीजा संचालन को फिर से शुरू करने का लक्ष्य बना रहा है. हालांकि हसीना के इस बयान के बाद ऐसा माना जा रहा है कि 650 दिन में उन्होनें खामोशी से वापसी की तैयारी कर ली है.