कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सत्ता संभालते ही राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में बड़े बदलाव करने सुरु कर दिए हैं. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए चुनावी घोषणापत्र के वादों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए धर्म-आधारित योजनाओं को रोकने का बड़ा निर्णय लिया है.
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि सोमवार को राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है. इसके तहत मदरसा विभाग और सूचना एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत चलाई जा रही सभी धर्म-आधारित सहायता योजनाओं को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. वर्तमान में जो परियोजनाएं सक्रिय हैं, वे केवल इस महीने के अंत तक ही जारी रहेंगी. इसके बाद जून महीने से इन सभी योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा.
बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने के लिए कैबिनेट ने 'अन्नपूर्णा योजना' को अपनी मंजूरी दे दी है. इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 1 जून से राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी. जो महिलाएं पहले से ही राज्य की 'लक्ष्मी भंडार' योजना का लाभ ले रही हैं, उन्हें बिना किसी परेशानी के सीधे इस नई योजना से जोड़ दिया जाएगा. शेष महिलाओं के लिए एक नया समर्पित पोर्टल खोला जाएगा.
पश्चिम बंगाल की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके दैनिक परिवहन को सुगम करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा तोहफा दिया है. कैबिनेट ने आगामी 1 जून से पूरे राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद अब महिलाएं बिना किसी किराए के पूरे प्रदेश में सफर कर सकेंगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से कामकाजी और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को सीधे तौर पर बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी.
प्रशासनिक सुधारों के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सॉल्ट लेक स्थित बीजेपी कार्यालय में अपना पहला 'जनता दरबार' लगाया. इस सार्वजनिक जनसुनवाई सत्र में छात्रों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के सैकड़ों लोग अपनी शिकायतें और मांगें लेकर पहुंचे. मुख्यमंत्री ने खुद सभी पीड़ितों से बात की और अधिकारियों को त्वरित निवारण के निर्देश दिए. पार्टी नेताओं के अनुसार, 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सुवेंदु अधिकारी अब नियमित रूप से इस तरह के संवाद सत्र आयोजित करेंगे.