नीदरलैंड की राजधानी हेग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यात्रा के दौरान भारत में मीडिया स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर उठाए गए सवालों पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत एक 'जीवंत लोकतंत्र' है, जहां अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत पहचान है.
'देश की सही समझ की कमी के कारण उठते हैं ऐसे सवाल'
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत को लेकर इस तरह के सवाल 'देश की सही समझ की कमी' के कारण उठाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि भारत 5000 साल पुरानी सभ्यता वाला देश है, जहां संस्कृति, भाषा, भोजन और धर्म की अभूतपूर्व विविधता मौजूद है. सिबी जॉर्ज ने कहा कि दुनिया के चार प्रमुख धर्म- हिंदू, बौद्ध, जैन, और सिख भारत में ही उत्पन्न हुए और आज भी यहां फल-फूल रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यहूदी समुदाय ने भारत में 2500 वर्षों तक बिना किसी उत्पीड़न के जीवन बिताया. उन्होंने इसाई और इस्लाम धर्म के भारत आगमन और उनके विकास का भी उल्लेख किया.
दरअसल पीएम मोदी की दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा के दौरान एक डच पत्रकार ने संयुक्त प्रेस वार्ता नहीं होने को लेकर सवाल उठाया और भारत में प्रेस की स्वतंत्रता तथा मुस्लिम समेत अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों पर चिंता जताई थी. इस पर जवाब देते हुए सिबी जॉर्ज ने हाल में हुए विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया और कहा कि भारत में लोकतंत्र बेहद मजबूत है. उन्होंने कहा कि हाल में हुए विधानसभा चुनावों में 90 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जो भारत की लोकतांत्रिक ताकत का बड़ा उदाहरण है.
उन्होंने कहा कि भारत ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए गरीबी कम करने और आर्थिक विकास हासिल करने का रास्ता चुना है. उन्होंने कहा- हम दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा है, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं, यही भारत की खूबसूरती है. सिबी जॉर्ज ने कहा कि आजादी के समय से भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी 11 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है. उन्होंने दावा किया कि यह भारत में अल्पसंख्यकों के सुरक्षित और समृद्ध जीवन का प्रमाण है.
डच अखबार 'डी वोल्क्सक्रांट' की रिपोर्ट के मुताबिक नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने पीएम मोदी से मुलाकात से पहले कथित तौर पर कहा था कि नीदरलैंड सरकार को भारत में प्रेस स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता है. हालांकि बाद में जेटन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत और नीदरलैंड दोनों लोकतंत्र, सुशासन और नियम आधारित विश्व व्यवस्था को महत्व देते हैं.