सोशल मीडिया पर अच्छा दिखने की होड़ ने अब खतरनाक रूप ले लिया है. युवा लड़के ज्यादा आकर्षक और नुकीले जबड़े के लिए अपने चेहरे पर हथौड़े, पैन या अन्य भारी चीजें मार रहे हैं. इसे 'बोन स्मैशिंग' कहा जा रहा है. यह ट्रेंड देखकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर चिंतित हैं.
यह ट्रेंड मुख्य रूप से 'लुक्समैक्सिंग' नामक ऑनलाइन कम्युनिटी से शुरू हुआ है. लुक्समैक्सिंग में लोग अपने लुक को बेहतर बनाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. बोन स्मैशिंग में लोग अपने चेहरे की हड्डियों, खासकर जबड़े, गाल की हड्डी या माथे पर हल्के-हल्के या जोर से वार करते हैं. उनका मानना है कि बार-बार चोट लगने से हड्डियां टूटती हैं और नई आकार में बनती हैं, जिससे चेहरा ज्यादा मजबूत और आकर्षक दिखता है. कुछ लोग हथौड़े का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ सॉसपैन या मसाज गन. टिकटॉक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वीडियो लाखों-करोड़ों बार देखे जा चुके हैं. एक इन्फ्लुएंसर 'क्लेविकुलर' जैसे युवाओं ने इसे बढ़ावा दिया है.
आजकल सोशल मीडिया पर परफेक्ट लुक का दबाव बहुत ज्यादा है. युवा लड़के सोचते हैं कि तीखा जबड़ा, मजबूत गाल की हड्डियां और नुकीला चेहरा उन्हें ज्यादा आकर्षक बनाएगा. वे फिल्मों, इंस्टाग्राम और टिकटॉक के मॉडल्स को देखकर खुद को कमतर समझते हैं. लुक्समैक्सिंग कम्युनिटी में यह सब 'सेल्फ इम्प्रूवमेंट' के नाम पर चल रहा है. लेकिन असल में यह गलतफहमी पर आधारित है.
डॉक्टर साफ कहते हैं कि यह तरीका पूरी तरह गलत और खतरनाक है. हड्डियां वर्कआउट की तरह नहीं बढ़तीं. बार-बार चोट से हड्डी टूट सकती है, नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और चेहरा बिगड़ सकता है.
खतरे:- चेहरे की हड्डियों का फ्रैक्चर (टूटना)
नसों में दर्द और सुन्न होना
चेहरे पर सूजन, चोट के निशान और असमानता
दांतों की समस्या, चबाने में दिक्कत
गंभीर मामलों में ब्रेन इंजरी, सर्जरी की जरूरत
लंबे समय में स्थायी विकृति
विशेषज्ञों का कहना है कि हड्डियां नियंत्रित तरीके से ही बदल सकती हैं, जैसे सर्जरी में. हथौड़े से मारने से कोई फायदा नहीं, सिर्फ नुकसान होता है.
चेहरे को आकर्षक बनाने के लिए सुरक्षित तरीके अपनाएं:-
नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार
अच्छी नींद और तनाव कम करना
स्किन केयर रूटीन
अगर जरूरी हो तो प्रमाणित डॉक्टर से सलाह लें, जैसे जॉलाइन एक्सरसाइज या सर्जरी
यह ट्रेंड युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य समस्या को भी दिखाता है. बॉडी इमेज और आत्मविश्वास की कमी उन्हें ऐसे खतरनाक रास्ते पर ले जा रही है. माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए.