नई दिल्ली: देश के प्राइवेट संस्थानों में नौकरी करने वालों के आंकड़े पेश कर सरकार भले ही युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के तमाम तरह के दावे करती हो, लेकिन इन निजी संस्थानों में कर्मचारियों के शोषण के मामले गाहे-बगाहे सामने आते ही रहते हैं. ताजा मामला एक महिला शिक्षिका का है, जिन्होंने प्राइवेट स्कूल में टॉक्सिक वर्क कल्चर से परेशान होकर अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. इस्तीफा सौंपने के बाद महिला ने वीडियो जारी कर इस्तीफा देने की वजह भी बताई है, जो अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
दरअसल, यूपी के जनपद गोरखपुर की रहने वाली अंकिता ने टीचर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. वो प्राइवेट स्कूल में बच्चों का पढ़ाने का काम करती थी. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने वीडियो जारी कर इस्तीफा सौंपने की वजह भी बताई है, जिससे प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले लोग खुद को रिलेट कर पा रहे हैं और यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोगों का उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है.
वायरल वीडियो में अंकिता को कहते हुए सुना जा सकता है कि हमें टीचर कहना बंद कर दीजिए, हम सिर्फ दिहाड़ी मजदूर बनकर रह गए हैं. कम सैलरी में किस तरह ज्यादा काम लिया जाता है इसका उदाहरण देते हुए वो कहती हैं कि यदि किसी को इंग्लिश टीचर के रूप में रखा गया है, तो उसी से ग्रामर, कन्वर्सेशन और कंप्यूटर जैसे अलग-अलग विषय भी पढ़वाए जाते हैं. इसके अलावा कई गैर-शैक्षणिक काम भी जबरन सौंप दिए जाते हैं, जिसके लिए कोई अतिरिक्त पैसे नहीं दिए जाते. स्कूल पहुंचने में मामूली सी देरी होने पर भी पूरे दिन की सैलरी काट ली जाती है और यदि कोई टीचर स्कूल परिसर में गलती से भी हिंदी में बात कर लेता है, तो उस पर फाइन लगा दिया जाता है.
मिलिए अंकिता शर्मा से, गोरखपुर की पूर्व शिक्षिका, जिन्होंने अपने प्राइवेट स्कूल से इस्तीफ़ा दे दिया है, आजकल बहुत वायरल है l
— Vishal Mohan Yadav (@VishalMYadav_) May 18, 2026
वीडियो में अंकिता भावुक और गुस्से में कहती हैं कि "हमें टीचर कहना बंद कर दीजिए, हम सिर्फ दिहाड़ी मजदूर बनकर रह गए हैं",
यदि किसी को इंग्लिश टीचर के रूप… pic.twitter.com/wGIznM3DpG
अंकिता का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. नेटिजन्स इस मुद्दे पर अंकिता का समर्थन कर रहे हैं और देश के प्राइवेट संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग सरकार से कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि सरकार की तरफ से प्राइवेट संस्थाओं के लिए कोई प्रभावी गाइडलाइंस तय नहीं किए गए हैं, जिसका फायदा उठाकर निजी संस्थान कर्मचारियों से कम सैलरी में ज्यादा काम करवा रहे हैं.
बता दें कि देश के कई निजी संस्थानों में इस तरह की टॉक्सिक वर्क कल्चर की ख़बरें सामने आती रहती है. विशेषज्ञों की मानें तो कार्यस्थल पर टॉक्सिक वर्क कल्चर से कर्मचारियों की मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और अगर यह लंबे समय तक चलता रहा तो इंसान अवसाद से भी घिर सकता है और यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है.