नई दिल्ली: देश में जनसंख्या, विवाह, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अक्सर चर्चा होती रहती है, लेकिन जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत इन विषयों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं, तो वह केवल एक बयान नहीं रह जाता, बल्कि समाज में एक नई बहस को जन्म देता है. रविवार को मोहन भागवत ने इन सभी विषयों पर विस्तार से बात की और कई ऐसे पहलू सामने रखे, जिन पर लोगों का ध्यान जाना स्वाभाविक है.
मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा कि शादी को केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी फैसला मानना पूरी तरह सही नहीं है. उनके अनुसार, विवाह का असर केवल पति-पत्नी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव समाज, देश की जनसंख्या संरचना और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है.
उन्होंने कहा कि अगर समाज को संतुलित और मजबूत बनाना है, तो हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि उसकी व्यक्तिगत पसंद कहीं न कहीं सामूहिक जिम्मेदारी से भी जुड़ी होती है. शादी केवल साथ रहने का निर्णय नहीं, बल्कि समाज के प्रति कर्तव्य निभाने का एक माध्यम भी है.
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "... People from the Hindu community have gradually abandoned these low-skilled jobs. Everyone is chasing after high-paying jobs. The result is that since there's no one else to do these jobs, their (infiltrators)… pic.twitter.com/NSsRSUHHDd
— ANI (@ANI) February 8, 2026Also Read
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जनसंख्या के मुद्दे पर बोलते हुए मोहन भागवत ने 'तीन-बच्चे के सिद्धांत' का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि पारंपरिक भारतीय सोच और कुछ आधुनिक मेडिकल शोध भी यह बताते हैं कि तीन बच्चों वाला परिवार मॉडल समाज और जनसंख्या संतुलन के लिहाज से बेहतर माना जा सकता है. उनके अनुसार, आज देश में जनसंख्या असंतुलन के पीछे तीन मुख्य कारण दिखाई देते हैं. पहला, जन्म दर में असमान बदलाव, दूसरा, धर्मांतरण और तीसरा, घुसपैठ.
घुसपैठ के विषय पर उन्होंने आम नागरिकों से सजग रहने की अपील की. उनका कहना था कि देश की सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी 'राज्य की आंख और कान' बनकर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचानी चाहिए.
अर्थव्यवस्था को लेकर भी मोहन भागवत ने एक अहम बात कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को केवल GDP के आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता. GDP यह तो बताता है कि उत्पादन कितना हुआ, लेकिन यह नहीं बताता कि आम लोगों का जीवन स्तर कैसा है. उनके अनुसार, आर्थिक मजबूती के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, आत्मनिर्भरता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचना भी जरूरी है. तभी देश की मुद्रा मजबूत होगी और लंबे समय तक स्थिरता बनी रह सकेगी.
मोहन भागवत के ये विचार समाज को यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि व्यक्तिगत फैसले, जनसंख्या संतुलन, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा आपस में कितने गहराई से जुड़े हुए हैं. उनके बयान एक बार फिर इन अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत को सामने लाते हैं.