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नाबार्ड प्रोजेक्ट्स पर उत्तराखंड सरकार सख्त, विभागों को मिला 3 दिन का अल्टीमेटम

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने नाबार्ड बैठक में विभागों को तीन दिन के भीतर परियोजनाएं पोर्टल पर अपलोड करने, बड़े क्लस्टर आधारित प्रोजेक्ट तैयार करने और समन्वित विकास पर जोर दिया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
नाबार्ड प्रोजेक्ट्स पर उत्तराखंड सरकार सख्त, विभागों को मिला 3 दिन का अल्टीमेटम
Courtesy: @DIPR_UK

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई. बैठक में ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF) के तहत अधिक से अधिक परियोजनाओं को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया. मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने प्रस्ताव अगले तीन दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड करें. साथ ही, पहले से चल रही परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव जल्द भेजने को कहा गया, ताकि धनराशि समय पर जारी की जा सके.

समन्वित योजना और बड़े क्लस्टर मॉडल पर फोकस

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का समग्र विकास तभी संभव है, जब सभी विभाग मिलकर एकीकृत दृष्टिकोण से परियोजनाएं तैयार करें. उन्होंने कृषि और बागवानी क्षेत्र में संपूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टरों को जोड़कर बड़े प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए. साथ ही, नाबार्ड से इन परियोजनाओं के लिए तकनीकी और विशेषज्ञ सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया.

गतिशक्ति पोर्टल और पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी

मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस दिया जाए, ताकि वह परियोजनाओं का अध्ययन कर 4 से 5 क्षेत्रों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चिन्हित कर सके. इन क्षेत्रों के लिए समग्र विकास योजना तैयार करने में नाबार्ड तकनीकी सहायता देगा. इस पर नाबार्ड ने जल्द विशेषज्ञ टीम तैनात करने का भरोसा दिया. इसके अलावा उद्यान विभाग की पॉलीहाउस परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा और पशुपालन विभाग को सभी जिलों में बड़े पशु अस्पताल स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए.

1000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव का लक्ष्य

बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजने का लक्ष्य तय किया गया है. अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो चुके हैं. इनमें से 271 करोड़ रुपये के प्रस्ताव नाबार्ड को भेजे जा चुके हैं, जबकि 210 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी नाबार्ड को मिल चुकी है. बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और नाबार्ड के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया.