Diljit Dosanjh Satluj: दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को रिलीज होने के महज एक दिन बाद ZEE5 प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया है. मूल रूप से 'पंजाब 95' नाम से बनी यह फिल्म 3 जुलाई को OTT पर रिलीज हुई थी, लेकिन विवादों के कारण इसे तुरंत वापस ले लिया गया.
सूत्रों के अनुसार फिल्म के कुछ हिस्सों का एंटी-इंडिया ताकतों द्वारा गलत इस्तेमाल किया जा सकता था. इसी वजह से इसे हटाने का फैसला लिया गया.फिल्म कई सालों से विवादों में रही है. पहले इसे थिएटर में रिलीज करने की कोशिश की गई, लेकिन सेंसर बोर्ड ने मौजूदा रूप में मंजूरी नहीं दी. बाद में इसे OTT प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया, जहां सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती, लेकिन संवेदनशील कंटेंट पर सरकार की नजर रहती है.
Rename it. Delay it. Cut it.
— 𝔹𝕒𝕛𝕨𝕒𓁆 (@shakkrpara) July 3, 2026
But the story of Shaheed Bhai Jaswant Singh Khalra still reaches his people.
Diljit's Punjab95 lives on as Satluj. https://t.co/F30ShnbtFa pic.twitter.com/CaQ1icQyej
फिल्म पंजाब के उस दौर पर आधारित है जब वहां militancy चरम पर थी. कहानी एक सामाजिक कार्यकर्ता की है, जो कथित फर्जी मुठभेड़ों और एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग्स की सच्चाई उजागर करने की कोशिश करता है. फिल्म में 1990 के दशक के पंजाब की घटनाओं को दिखाया गया है.
ZEE5 ने इंस्टाग्राम पर आधिकारिक पोस्ट में फिल्म हटाने की पुष्टि की. कंपनी ने लिखा- 'हम 'सतलुज' और इसके क्रिएटिव विजन के पूरी तरह साथ खड़े हैं. हम मानते हैं कि मजबूत कहानियां प्रेरणा देती हैं, टिकती हैं और लंबा असर छोड़ती हैं. हम सच्ची और अर्थपूर्ण कहानियों को बढ़ावा देते रहेंगे.'
Satluj may have paused. But the conversation it started hasn’t.
— ZEE5Official (@ZEE5India) July 5, 2026
Thank you for the incredible love.
We hope to bring it back soon.#Satluj pic.twitter.com/Ox3MZIBvlT
ZEE5 ने आगे कहा कि फिल्म भारत में आगे नोटिस तक उपलब्ध नहीं रहेगी. कंपनी इसे वापस लाने के लिए सही प्रक्रिया का पालन करेगी.
फिल्म को लेकर शुरू से ही विवाद था. कई संगठनों और लोगों ने आरोप लगाया कि यह फिल्म पंजाब के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है. कुछ का कहना है कि यह militancy के समय की घटनाओं को एकतरफा तरीके से दिखाती है, जिससे देश की छवि खराब हो सकती है. सूत्र बताते हैं कि थिएट्रिकल रिलीज के लिए जब सर्टिफिकेट मांगा गया तो कई आपत्तिजनक हिस्सों पर सवाल उठे.
'सतलुज' पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है. 1952 में अमृतसर में जन्मे खालरा, कथित हत्याओं और गुप्त रूप से शवों के अंतिम संस्कार के मामलों का पर्दाफाश करने के लिए जाने जाते थे. वे पहले बैंक में काम करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी तरह से मानवाधिकारों के लिए काम करना शुरू कर दिया.
इस फिल्म का असली नाम 'पंजाब 95' था. इसे 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफ़िकेशन के पास भेजा गया था, जहां यह तीन साल तक अटकी रही. फिल्म बनाने वालों का आरोप है कि 'सेंसर बोर्ड' ने इसमें 127 कट लगाने को कहा था. बाद में पिछले शुक्रवार को इसे ZEE5 पर 'सतलुज' नाम से रिलीज़ किया गया.