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सावधान! क्या बिना चोट के भी आपके शरीर पर पड़ रहे हैं नीले निशान? भूलकर भी न करें नजरअंदाज

बिना चोट के शरीर पर बार-बार पड़ने वाले नीले निशान हमेशा सामान्य नहीं होते. इनके पीछे विटामिन की कमी, दवाओं का असर, रक्त संबंधी समस्याएं या ऑक्सीजन की कमी जैसी वजहें हो सकती हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
सावधान! क्या बिना चोट के भी आपके शरीर पर पड़ रहे हैं नीले निशान? भूलकर भी न करें नजरअंदाज
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में कई लोगों को शरीर पर अचानक नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं. अक्सर लोग इसे मौसम का असर या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर पर बिना चोट के बार-बार दिखाई देने वाले नीले निशान कई बार किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकते हैं. ऐसे लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं माना जाता.

बिना चोट के शरीर पर पड़ने वाले नीले निशानों को आम भाषा में नील कहा जाता है. कई लोग इसे सायनोसिस समझ लेते हैं, जबकि सायनोसिस और सामान्य नील में अंतर होता है. सायनोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें खून में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण त्वचा, होंठ, नाखून या उंगलियों के सिरे नीले दिखाई देने लगते हैं. यह अक्सर हृदय या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है.

कब होता है सायनोसिस?

विशेषज्ञों के अनुसार केवल गर्मी पड़ने से सायनोसिस नहीं होता. हालांकि अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण रक्त संचार प्रभावित हो सकता है, जिससे लक्षण अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं. यदि किसी व्यक्ति के होंठ या उंगलियां लगातार नीली दिखाई दें या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए.

त्वचा पर बिना चोट के नीले निशान बनने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार त्वचा के नीचे मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं और रक्त आसपास के ऊतकों में फैल जाता है. इससे त्वचा नीली या बैंगनी दिखाई देने लगती है. कई मामलों में चोट इतनी हल्की होती है कि व्यक्ति को उसका एहसास भी नहीं होता.

और क्या हो सकता है कारण?

कुछ दवाएं भी शरीर पर जल्दी नील पड़ने का कारण बन सकती हैं. खासतौर पर खून को पतला करने वाली दवाओं का सेवन करने वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखी जाती है. इसके अलावा विटामिन सी और विटामिन के की कमी भी त्वचा पर नीले निशान बनने की वजह बन सकती है. बढ़ती उम्र के साथ त्वचा और रक्त वाहिकाएं कमजोर होने लगती हैं, इसलिए बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है.

कई लोग नीले निशानों को खून के थक्के यानी ब्लड क्लॉट समझ लेते हैं. हालांकि दोनों स्थितियां अलग होती हैं. सामान्य नील त्वचा के नीचे जमा हुए रक्त के कारण बनता है और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है. वहीं शरीर के अंदर बनने वाले असामान्य रक्त के थक्के गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.