Vitamin B12 Supplement Mistake: आजकल विटामिन B12 की कमी बहुत आम समस्या बन गई है. थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी और बाल झड़ना जैसी शिकायतें होने पर लोग B12 सप्लीमेंट लेने लगते हैं. लेकिन फार्मेसी या ऑनलाइन सर्च करते समय दो नाम अक्सर सामने आते हैं – मिथाइलकोबालामिन और सायनोकोबालामिन. मार्केटिंग की वजह से कई लोग सोचते हैं कि मिथाइलकोबालामिन ही बेहतर है और महंगा वाला ही खरीदना चाहिए. लेकिन क्या ये सच में सही है?
विटामिन B12 के ये दोनों रूप B12 की कमी दूर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं. मिथाइलकोबालामिन शरीर में सीधे सक्रिय रूप है, यानी शरीर इसे बिना बदलने के इस्तेमाल कर सकता है. यह खासतौर पर नसों से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है. वहीं सायनोकोबालामिन सिंथेटिक रूप है, जिसे शरीर अपने अंदर लेने के बाद सक्रिय रूप में बदलता है. यह आम B12 की कमी के इलाज में बहुत प्रभावी है.
मुंबई के ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुप खत्री के अनुसार दोनों ही रूप दशकों से सुरक्षित और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
डॉ. खत्री कहते हैं कि ऐसा नहीं है. अक्सर मार्केटिंग की वजह से मिथाइलकोबालामिन को 'बेहतर' बताया जाता है, लेकिन मेडिकल एविडेंस के हिसाब से दोनों ही ज्यादातर मामलों में बराबर असरदार हैं. महंगा वाला सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है.
नसों की समस्या, डायबिटीज या न्यूरोलॉजिकल दिक्कत हो तो डॉक्टर मिथाइलकोबालामिन की सलाह दे सकते हैं.
सामान्य B12 की कमी, एनर्जी बढ़ाने या रोजमर्रा की थकान के लिए सायनोकोबालामिन भी ठीक काम करता है.
किडनी की समस्या हो तो डॉक्टर खास सावधानी बरतते हैं.
बहुत से लोग सायनोकोबालामिन से डरते हैं क्योंकि इसमें 'सायनाइड' शब्द जुड़ा है. लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इसकी मात्रा बहुत कम होती है और शरीर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचाती. यह दशकों से सुरक्षित माना जा रहा है.
ज्यादातर मामलों में सही डोज और नियमित इस्तेमाल से दोनों रूप B12 लेवल को ठीक कर देते हैं. सबसे जरूरी बात – खुद से सप्लीमेंट शुरू न करें. ब्लड टेस्ट करवाकर डॉक्टर की सलाह से ही लें. गलत रूप या गलत डोज से फायदा होने के बजाय नुकसान भी हो सकता है.