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फेफड़ों के कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता! Eli Lilly की दवा Retevmo ने 83% तक घटाया बीमारी के लौटने का खतरा

एली लिली कंपनी की कैंसर दवा 'रेटेवमो' के तीसरे चरण के ट्रायल में पॉजिटिव नतीजे मिले हैं. यह दवा शुरुआती स्टेज के फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में इसके दोबारा लौटने या मौत के जोखिम को 83% तक कम करती है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
फेफड़ों के कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता! Eli Lilly की दवा Retevmo ने 83% तक घटाया बीमारी के लौटने का खतरा
Courtesy: ai generated

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए मेडिकल जगत से एक बहुत ही राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल एक नई दवा के ट्रायल में वैज्ञानिकों को ऐसी कामयाबी मिली है जो फेफड़ों के कैंसर के इलाज में गेम-चेंजर साबित हो सकती है. दिग्गज दवा निर्माता कंपनी एली लिली ने अपनी कैंसर की दवा 'रेटेवमो' के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक नतीजे घोषित किए हैं. इस स्टडी में यह पाया गया है कि यह दवा शुरुआती स्टेज के विशेष प्रकार के फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में कैंसर के दोबारा लौटने या उससे होने वाली मौत के खतरे को बहुत हद तक कम कर देती है.

'लिब्रेटो-432' नाम के ट्रायल से सामने आए नतीजे

यह शानदार नतीजे 'लिब्रेटो-432' नाम के ट्रायल से सामने आए हैं. इस रिसर्च में उन मरीजों पर रेटेवमो दवा के असर को देखा गया जिनकी पहले ही सर्जरी या रेडिएशन थेरेपी हो चुकी थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों को इलाज के बाद रेटेवमो दवा दी गई उनमें कैंसर के दोबारा उभरने या मौत होने का जोखिम उन मरीजों के मुकाबले 83 फीसदी तक कम हो गया जिन्हें प्लेसिबो दी गई थी.

इस बड़े ट्रायल में स्टेज 1B से स्टेज 3A वाले कुल 151 मरीजों को शामिल किया गया था. यह अपनी तरह की पहली ऐसी स्टडी है जिसमें शुरुआती इलाज के बाद एक खास 'आरईटी इनहिबिटर' दवा के असर को परखा गया है.

स्टेज 2 से स्टेज 3A वाले मरीजों में बेहतरीन असर

नतीजों के मुताबिक स्टेज 2 से स्टेज 3A वाले मरीजों में इस दवा का सबसे बेहतरीन असर देखा गया. इलाज के 24 महीनों के बाद रेटेवमो लेने वाले करीब 92 फीसदी मरीज पूरी तरह ठीक और सुरक्षित पाए गए हैं. इसके उलट प्लेसिबो ग्रुप के केवल 61 फीसदी मरीज ही इस अवधि में बीमारी से बचे रह सके.

ASCO कीसालाना बैठक में पेश किया जाएंगे नतीजे

इन नतीजों को 'अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी' (ASCO) की 2026 की सालाना बैठक में पेश किया जाएगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कामयाबी के बाद अब फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में जेनेटिक या जीनोमिक टेस्टिंग (Genetic Testing) कराना बेहद जरूरी हो जाएगा ताकि सही समय पर इस टारगेटेड थेरेपी का फायदा देकर मरीजों की जान बचाई जा सके.