नई दिल्ली: भारत में नारियल फोड़ना शुभ माना जाता है लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में यही प्रक्रिया भावनाओं से जुड़ी एक गहरी परंपरा बन चुकी है. इंडोनेशिया की लामाहोलोट जनजाति में नारियल को काटते या फोड़ते समय लोग रोने लगते हैं. इसके पीछे उनकी एक खास धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है.
यह जनजाति इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा क्षेत्र के पूर्वी फ्लोरेस और लेम्बाटा द्वीपों में रहती है. यहां ‘लेवाक तापो’ नाम का एक अनुष्ठान किया जाता है, जो विशेष रूप से उन लोगों के लिए होता है जिनकी मृत्यु असामान्य या अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो.
लामाहोलोट समुदाय के अनुसार यह अनुष्ठान मृत व्यक्ति की मौत के पीछे के कारणों को समझने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किया जाता है. इस प्रक्रिया में नारियल को विशेष तरीके से फोड़ा जाता है और उसकी स्थिति, दरारों और बनावट के आधार पर संकेत निकाले जाते हैं.
इस अनुष्ठान को समुदाय का आध्यात्मिक नेता या पुजारी करता है, जिसे शमन कहा जाता है. शमन नारियल को तोड़कर यह जानने की कोशिश करता है कि मृत्यु प्राकृतिक थी या किसी अन्य कारण से हुई. यह प्रक्रिया केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि पूर्वजों और देवताओं से संवाद का माध्यम मानी जाती है.
नारियल टूटने के बाद जब उसके संकेतों के आधार पर मृत्यु के कारण बताए जाते हैं, तो परिवार और समुदाय के लोग भावुक हो जाते हैं. इसी वजह से कई बार लोग रोने लगते हैं. उनके लिए यह सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि अपने प्रियजनों की आत्मा से जुड़ने का क्षण होता है.
जनजाति का यह भी मानना है कि अगर किसी की मौत कम उम्र में या अचानक होती है, तो वह पिछले कर्मों या पूर्वजों के अधूरे कर्मों से जुड़ी हो सकती है. ऐसे में इस अनुष्ठान के जरिए समाधान और शांति की तलाश की जाती है.
सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में इस परंपरा की जानकारी सामने आने के बाद लोग हैरान हैं. कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, जबकि कई इसे सांस्कृतिक विरासत और आस्था का हिस्सा मानते हैं.