नई दिल्ली: जब भी किसी समुद्र की कल्पना की जाती है तो सबसे पहले उसकी लहरें और किनारे आंखों के सामने आते हैं. लेकिन धरती पर एक ऐसा सागर भी है, जिसका कोई तट नहीं है. न समुद्र तट, न बीच और न ही कोई जमीन इसकी सीमा तय करती है. फिर भी यह पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है. इस अनोखे सागर का नाम सारगासो सागर (Sargasso Sea) है. यह उत्तरी अटलांटिक महासागर के बीच स्थित है और दुनिया का इकलौता ऐसा सागर माना जाता है, जिसकी सीमाएं किसी देश या महाद्वीप से नहीं जुड़ी हैं. इसकी यही विशेषता इसे वैज्ञानिकों और समुद्री शोधकर्ताओं के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र बनाए रखती है.
सारगासो सागर की सबसे अनोखी बात यह है कि इसकी सीमा चार बड़ी समुद्री धाराओं से तय होती है. पश्चिम में गल्फ स्ट्रीम, उत्तर में नॉर्थ अटलांटिक करंट, पूर्व में कैनरी करंट और दक्षिण में नॉर्थ अटलांटिक इक्वेटोरियल करंट इसे चारों ओर से घेरती हैं. इन्हीं धाराओं के कारण यह सागर बिना किसी तटरेखा के भी अपना अलग अस्तित्व बनाए रखता है.
इस सागर का पानी बेहद साफ और गहरे नीले रंग का माना जाता है. इसकी दृश्यता इतनी अधिक है कि कई स्थानों पर 50 से 60 मीटर तक पानी के भीतर देखा जा सकता है. शांत जल और स्वच्छ वातावरण के कारण यह समुद्री अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है.
सारगासो सागर का नाम 'सारगासम' नाम की भूरी समुद्री घास से पड़ा है. यह घास समुद्र की सतह पर ही तैरती रहती है और इसे बढ़ने के लिए समुद्र तल की आवश्यकता नहीं होती. विशाल क्षेत्र में फैली यह वनस्पति इस सागर की सबसे अलग पहचान बन चुकी है.
यह तैरती समुद्री घास कई दुर्लभ मछलियों, केकड़ों, कछुओं और अन्य समुद्री जीवों के लिए भोजन और आश्रय का काम करती है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह क्षेत्र समुद्री जैव विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है और समुद्री जीवन चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
प्राचीन समय में नाविक इस सागर को रहस्यमयी मानते थे और मानते थे कि यहां जहाज फंस जाते हैं. हालांकि आधुनिक वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री धाराओं से घिरा होना है. यही वजह है कि बिना किसी किनारे वाला यह सागर आज भी दुनिया के सबसे अनोखे प्राकृतिक आश्चर्यों में गिना जाता है.