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150 साल बाद समुद्र ने उगला राज, लापता 'काले सोने' से भरा जहाज आखिर कहां मिला? जानकर रह जाएंगे हैरान

ऑस्ट्रेलिया में ऑफशोर विंड फार्म सर्वे के दौरान 150 साल पहले डूबा 615 टन कोयला ले जा रहा 'सिटी ऑफ होबार्ट' जहाज मिला. जानिए इस ऐतिहासिक खोज की पूरी कहानी.

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Edited By: Reepu Kumari
150 साल बाद समुद्र ने उगला राज, लापता 'काले सोने' से भरा जहाज आखिर कहां मिला? जानकर रह जाएंगे हैरान
Courtesy: ChatGpt

समुद्र अपने भीतर न जाने कितने ऐसे रहस्य छिपाए बैठा है, जिनका जवाब इंसान दशकों तक तलाशता रहता है. ऑस्ट्रेलिया के समुद्र में हुई एक नई खोज ने करीब डेढ़ सदी पुराने ऐसे ही रहस्य से पर्दा उठा दिया है. यह खोज किसी पुरातात्विक अभियान के दौरान नहीं, बल्कि भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा परियोजना के लिए किए जा रहे समुद्री सर्वे में हुई. आधुनिक तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों को वह जहाज मिल गया, जो 150 साल पहले कोयले का बड़ा जखीरा लेकर समुद्र में समा गया था.

150 साल पुराना रहस्य आखिरकार सामने आया

समुद्र की गहराइयों में दफन इतिहास ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. ऑस्ट्रेलिया के गिप्सलैंड समुद्री क्षेत्र में ऑफशोर विंड फार्म परियोजना के लिए किए जा रहे सर्वे के दौरान विशेषज्ञों को एक पुराने जहाज का मलबा मिला. जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह वही 'सिटी ऑफ होबार्ट' जहाज है, जो वर्ष 1877 में रहस्यमयी तरीके से समुद्र में डूब गया था. करीब 150 वर्षों तक इस जहाज का कोई सुराग नहीं मिल पाया था. अब इसकी खोज को इतिहास, आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के संगम के रूप में देखा जा रहा है.

स्वच्छ ऊर्जा परियोजना के दौरान मिली बड़ी सफलता

रिपोर्ट के अनुसार, स्पेन की ऊर्जा कंपनी इबरड्रोला ऑस्ट्रेलिया के गिप्सलैंड तट पर ऑफशोर विंड फार्म विकसित करने की तैयारी कर रही थी. इसी परियोजना के तहत समुद्र की तलहटी का विस्तृत सोनार सर्वे किया गया. सर्वे के दौरान विशेषज्ञों को दो पुराने जहाजों के अवशेष दिखाई दिए. जब इनकी विस्तृत जांच की गई तो उनमें से एक की पहचान 150 साल से लापता 'सिटी ऑफ होबार्ट' के रूप में हुई.

615 टन कोयला लेकर निकला था जहाज

'सिटी ऑफ होबार्ट' जुलाई 1877 में न्यूकैसल से मेलबर्न के लिए रवाना हुआ था. उस समय जहाज में लगभग 615 टन कोयला लदा हुआ था, जिसे उस दौर में बेहद मूल्यवान माना जाता था. इसी वजह से कोयले को अक्सर 'काला सोना' भी कहा जाता था. यात्रा के दौरान जहाज का प्रोपेलर शाफ्ट टूट गया. तकनीकी खराबी के कारण जहाज में तेजी से पानी भरने लगा और हालात बिगड़ते चले गए.

चालक दल ने बचाई अपनी जान

स्थिति गंभीर होने पर जहाज के चालक दल ने लाइफबोट का सहारा लिया और समय रहते जहाज छोड़ दिया. सभी सदस्य सुरक्षित बच निकले, लेकिन 'सिटी ऑफ होबार्ट' समुद्र की गहराइयों में हमेशा के लिए समा गया. उस समय जहाज की सटीक लोकेशन दर्ज नहीं हो सकी थी, इसलिए कई दशकों तक उसका मलबा खोजा नहीं जा सका.

60 मीटर गहराई में मिला जहाज

विशेषज्ञों के अनुसार जहाज का मलबा समुद्र की करीब 60 मीटर गहराई में मिला. इतनी गहराई में पहुंचना आसान नहीं माना जाता, इसलिए इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली गई. सर्वे में मिली लोकेशन पर गोताखोर नीचे उतरे और जहाज की संरचना तथा अन्य ऐतिहासिक संकेतों का अध्ययन किया. इसके बाद पुष्टि हुई कि यह वास्तव में 'सिटी ऑफ होबार्ट' ही है.

आधुनिक तकनीक ने खोला इतिहास का पन्ना

इस परियोजना का उद्देश्य केवल समुद्र की भौगोलिक और तकनीकी स्थिति का अध्ययन करना था, ताकि भविष्य में विंड टर्बाइन स्थापित की जा सकें. हालांकि इसी प्रक्रिया में एक ऐसी ऐतिहासिक खोज सामने आई, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. यह घटना दिखाती है कि आधुनिक सोनार मैपिंग और समुद्री सर्वे जैसी तकनीकें केवल इंजीनियरिंग परियोजनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों को खोजने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं.

जहां कभी कोयला था, अब बनेगी स्वच्छ ऊर्जा

इस पूरी खोज का सबसे दिलचस्प पहलू इसका प्रतीकात्मक महत्व है. जिस समुद्री क्षेत्र में कभी कोयले से लदा जहाज डूबा था, वहीं अब हवा से बिजली बनाने की योजना पर काम चल रहा है. यह बदलाव ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया की बदलती सोच को भी दर्शाता है. जीवाश्म ईंधन से आगे बढ़कर अब स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता दी जा रही है.

तीन चरणों में तैयार होगा बड़ा प्रोजेक्ट

'ऑरोरा ग्रीन' नाम की इस ऑफशोर विंड परियोजना को तीन चरणों में विकसित करने की योजना बनाई गई है. परियोजना के तहत करीब 150 बड़े विंड टर्बाइन लगाए जा सकते हैं. इसकी अनुमानित उत्पादन क्षमता लगभग 3 गीगावॉट होगी, जिससे बड़ी संख्या में घरों तक स्वच्छ बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

अब ऐतिहासिक धरोहर के रूप में रहेगा सुरक्षित

जहाज की पहचान पूरी होने के बाद 'सिटी ऑफ होबार्ट' को ऑस्ट्रेलिया के अंडरवॉटर कल्चरल हेरिटेज कानून के तहत संरक्षित कर दिया गया है. अब इस जहाज को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में शोधकर्ता समुद्री इतिहास, व्यापार और उस दौर की नौवहन तकनीक का विस्तृत अध्ययन कर सकें.