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Minimum Pension: वित्त मंत्रालय ने लाखों पेंशनर्स को दिया बड़ा झटका! EPFO की इस सिफारिश को मानने से किया इनकार

सीबीटी की शनिवार को हुई 235वीं बैठक में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज देने की सिपारिश की गई है जो तीन साल में सबसे ज्यादा है.

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Minimum Pension: वित्त मंत्रालय ने लाखों पेंशनर्स को दिया बड़ा झटका! EPFO की इस सिफारिश को मानने से किया इनकार

Minimum Pension: केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के वर्तमान  न्यूनतम पेंशन 1000 को बढ़ाकर 2000 रुपए करने के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है. यह प्रस्ताव श्रम मंत्रालय ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजा था.  EPFO के फैसले लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड (CBT) की शनिवार को हुई हालिया बैठक में इस प्रस्ताव को नामंजूर किये जाने के बारे में जानकारी दी गई.

मामले के जानकार सूत्रों ने बताया कि सरकार की उच्चाधिकार समिति ने EPS के तहत न्यूनतम पेंशन को 1000 से बढ़ाकर 2000 करने के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय को भेजा था, सरकार ने ही इस उच्चाधिकार समिति का गठन किया था. समिति ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रस्ताव का प्रस्ताव भेजा था लेकिन वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव से सहमत नहीं था.

देश के 75.5 लाख पेंशनभोगियों को बड़ा झटका

सामाजिक सुरक्षा संगठन की वित्त वर्ष 2023 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, इस पेंशन योजना के अंतर्गत 75.5 लाख पेंशनभोगी आते हैं, जिनमें से 36.4 लाख पेंशनर्स को मासिक 1000 रुपए पेंशन मिलती है. इस क्रम में 11.7 लाख पेंशनर्स को 1001 से लेकर 1500 रुपए तक मासिक पेंशन मिलती है जबकि 8,68,000 पेंशनर्स को 1501 से 2000 रुपए तक पेंशन मिलती है और केवल 26,769 पेंशनर्स को 5000 रुपए से अधिक पेंशन मिलती है.

'1000 रुपए की मासिक पेंशन बेहद अपर्याप्त'

 ईपीएस, 1995 स्व वित्त मुहैया  कराने वाली योजना है. इसमें कर्मचारी की मासिक आय का 8.33 प्रतिशत कर्मचारी भविष्य निधि कोष में मुहैया कराया जाता है. इसके अलावा केंद्र सरकार मासिक वेतन पर 1.66 प्रतिशत  (केवल 15000 रुपए से कम के वेतन पर) राशि मुहैया करवाती है. बता दें कि संसद की श्रम मामलों की स्थायी समिति ने मार्च 2022 में श्रम मंत्रालय से कहा था कि 1000 रुपए की मासिक पेंशन बेहद अपर्याप्त है.

गौरतलब है कि सीबीटी की शनिवार को हुई 235वीं बैठक में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज देने की सिफारिश की गई है जो तीन साल में सबसे ज्यादा है.

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