नई दिल्ली: आज के समय में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की सोच और जानकारी का बड़ा जरिया बन चुका है. लेकिन AI तकनीक के बढ़ने के साथ डीपफेक यानी नकली फोटो, वीडियो और ऑडियो का खतरा भी तेजी से बढ़ा है. इसे देखते हुए भारत सरकार अब पूरी तरह सख्त हो गई है.
सरकार ने पहले ही AI से बने कंटेंट को पहचानने के लिए गाइडलाइन्स जारी की थीं, लेकिन अब नए नियम और भी ज्यादा कड़े कर दिए गए हैं. अब सोशल मीडिया कंपनियों को हर हाल में इन नियमों का पालन करना होगा.
सरकार ने साफ कहा है कि हर AI से बने कंटेंट पर स्पष्ट लेबल होना जरूरी है, ताकि यूजर आसानी से पहचान सके कि यह असली है या नकली. अगर कोई डीपफेक कंटेंट कानून तोड़ता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे 3 घंटे के अंदर हटाना होगा. वहीं, अगर कंटेंट संवेदनशील है जैसे किसी की फर्जी पहचान या अश्लील सामग्री, तो शिकायत मिलने के 2 घंटे के अंदर उसे हटाना जरूरी होगा.
अब कंपनियों को ऐसे सिस्टम लगाने होंगे जो डीपफेक कंटेंट को पहले ही पहचानकर रोक सकें. अगर कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसे IT Act के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour) खत्म हो सकती है. इसका मतलब है कि कंपनी पर केस भी हो सकता है.
भारत अकेला नहीं है. यूरोप और दूसरे देशों में भी डीपफेक को लेकर चिंता बढ़ रही है. वहां भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को फेक कंटेंट पहचानने और हटाने के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं.
आज के समय में डीपफेक को पहचानना आम लोगों के लिए काफी मुश्किल हो गया है. ऐसे में सरकार का यह कदम यूजर्स की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. अब कंपनियों को डेटा सुरक्षा, तेज कार्रवाई और पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान देना होगा. साफ संदेश है कि अगर नियम नहीं मानेंगे, तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.