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क्या सोशल मीडिया आपकी सोच और पसंद को कंट्रोल कर रहा है? जानें सच्चाई

आजकल सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट का साधन नहीं रह गया है. इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, टिकटॉक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म हमारी सोच, पसंद और फैसलों को चुपचाप इफेक्ट कर रहे हैं.

Shilpa Shrivastava
क्या सोशल मीडिया आपकी सोच और पसंद को कंट्रोल कर रहा है? जानें सच्चाई
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: आजकल सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट का साधन नहीं रह गया है. इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, टिकटॉक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म हमारी सोच, पसंद और फैसलों को चुपचाप इफेक्ट कर रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया हमारी सोच और पसंद को कंट्रोल कर रहा है? इसके पीछे एल्गोरिदम क्या है, चलिए जानते हैं.

एल्गोरिदम कैसे काम करता है?

हर सोशल मीडिया ऐप में एल्गोरिदम होता है. यह आपकी पसंद, सर्च हिस्ट्री, लाइक्स और वॉच टाइम को देखकर आपको वही कंटेंट दिखाता है जो आपको पसंद आने की संभावना हो. इसका नतीजा यह होता है कि आप एक ही तरह की चीजें बार-बार देखते हैं. नई सोच या अलग राय कम नजर आती है. इसे इको चैंबर कहा जाता है.

क्या इससे आपकी पसंद पर असर पड़ता है?

सोशल मीडिया, किसी भी ट्रेंड को तेजी से फैलाता है. कोई ड्रेस, गैजेट, फूड या लाइफस्टाइल वायरल होता है तो लाखों लोग उसे फॉलो करने लगते हैं. कई बार हम अपनी असली जरूरत के बजाय ट्रेंड की वजह से कुछ खरीद लेते हैं. यह हमारी पसंद को बाहर से कंट्रोल करने जैसा लगता है.

क्या इससे सोच पर असर पड़ता है?

न्यूज और राय भी एल्गोरिदम के हिसाब से आती हैं. अगर आप किसी एक पक्ष की चीजें ज्यादा देखते हैं तो दूसरी राय कम नजर आती है. इससे सोच एकतरफा हो सकती है. कंपेरिजन भी बढ़ जाता है. दूसरों की परफेक्ट जिंदगी देखकर खुद को कमतर महसूस करने वाले लोग बढ़ रहे हैं.

मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है?

लगातार स्क्रॉल करने से ध्यान कमजोर होने लगता है. नींद खराब होती है. चिंता और डिप्रेशन के मामले बढ़े हैं. लाइक्स और कमेंट्स पर निर्भरता आत्मविश्वास को प्रभावित करती है. कई स्टडीज बताती हैं कि ज्यादा सोशल मीडिया यूज करने वाले युवा ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं.

इससे बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

  • स्क्रीन टाइम लिमिट लगाएं.  

  • नोटिफिकेशन ऑफ रखें.  

  • अलग-अलग स्रोतों से जानकारी लें.  

  • रियल लाइफ में ज्यादा समय बिताएं.  

  • डिजिटल डिटॉक्स का अभ्यास करें.

नोट: सोशल मीडिया पूरी तरह खराब नहीं है. यह जानकारी, एंटरटेनमेंट और कनेक्शन का अच्छा जरिया है, लेकिन अगर हम इसे अनियंत्रित छोड़ दें तो यह हमारी सोच और पसंद को चुपचाप कंट्रोल कर सकता है.