सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के पैसों में गड़बड़ी की जांच के दौरान चोरी की 105 अलग-अलग घटनाओं का खुलासा किया है. सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयानों और दान के रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के बाद एसआईटी ने यह निष्कर्ष निकाला है. इससे पहले राज्य सरकार द्वारा गठित शुरुआती एसआईटी ने 70 घटनाओं को दर्ज किया था.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एसआईटी ने अपनी स्थिति रिपोर्ट (Status Report) पेश की. अदालत ने अब तक की जांच पर संतोष व्यक्त किया है. जांच टीम ने सैकड़ों घंटे की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और डिजिटल जमा रसीदों की जांच कर यह पता लगाया कि दान की राशि को मंदिर के आधिकारिक बैंक खातों में जमा कराने से पहले कैसे चुराया गया था.
उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया कि मामले में 25 सितंबर तक आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया जाएगा. 25 सितंबर की यह समयसीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की वैधानिक अवधि उसी दिन पूरी हो रही है, जिससे आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिलने का खतरा टल जाएगा.
जून महीने में पहली बार दान की राशि में करोड़ों रुपये के हेरफेर की बात सामने आई थी. इसके बाद दान प्रबंधन से जुड़े 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए हैं. आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और चोरी जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.