देहरादून: उत्तराखंड सरकार अब कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में संगठित तरीके से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है. राज्य की पर्यावरणीय क्षमता और विशाल वन क्षेत्र को देखते हुए इस दिशा में नई पहल शुरू की जा रही है. सरकार नैबकान्स को नॉलेज पार्टनर बनाने पर विचार कर रही है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कार्बन क्रेडिट से जुड़े प्रोजेक्ट, जागरूकता अभियान और तकनीकी मार्गदर्शन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी.
पर्यावरण निदेशालय ने नैबकान्स को नॉलेज पार्टनर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार चल रहा है. मंजूरी मिलने के बाद संस्था राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन करेगी और यह तय करेगी कि किन क्षेत्रों में कार्बन क्रेडिट से जुड़ी परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं.
सरकार का मानना है कि उत्तराखंड के वन और प्राकृतिक संसाधन कार्बन क्रेडिट के लिहाज से बड़ी संभावना रखते हैं. यदि स्थानीय समुदायों को सही जानकारी, तकनीकी सहायता और आवश्यक प्रशिक्षण मिले तो वे इस व्यवस्था से आय अर्जित कर सकते हैं. इसी उद्देश्य से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है.
पर्यावरण निदेशालय के निदेशक एसपी सुबुद्धि के अनुसार नैबकान्स को कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं में विशेष अनुभव हासिल है. यही कारण है कि संस्था की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग राज्य में गुणवत्तापूर्ण प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए किया जाएगा. इससे योजनाओं को वैज्ञानिक आधार और बेहतर दिशा मिलने की उम्मीद है.
नैबकान्स केवल एक्शन प्लान तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी. संस्था विभिन्न विभागों द्वारा तैयार की जाने वाली परियोजनाओं का परीक्षण भी करेगी. साथ ही यह सुझाव देगी कि किन क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं और उन्हें लागू करने के लिए कौन से विभाग या समुदाय सबसे उपयुक्त होंगे.
कार्बन क्रेडिट से जुड़े सभी कार्यों के समन्वय के लिए सरकार ने पर्यावरण निदेशालय को नोडल एजेंसी बनाया है. जल्द ही यहां कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट डेवलपमेंट प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य मजबूत व्यवस्था तैयार करने के बाद भविष्य में कार्बन ट्रेडिंग की दिशा में भी प्रभावी कदम बढ़ाना है.