देहरादून के भविष्य को लेकर महायोजना-2041 पर अंतिम चरण की जनसुनवाई में शहर के विकास को नई सोच के साथ जोड़ने की मांग सामने आई है. विभिन्न संगठनों और नागरिकों ने सुझाव दिया कि राजधानी का विकास केवल सड़कें चौड़ी करने और नए फ्लाईओवर बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए. इसके बजाय ऐसा शहर विकसित किया जाए, जहां लोगों की सुविधा, स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्राथमिकता मिले.
जनसुनवाई के दौरान प्रस्तुत सुझावों में देहरादून को यूरोप के प्रमुख शहरों की तर्ज पर विकसित करने का विचार प्रमुख रहा. लोगों ने सुरक्षित साइकिल ट्रैक, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, अधिक हरित क्षेत्र और संतुलित शहरी विकास की जरूरत बताई. उनका मानना है कि यदि इन पहलुओं को महायोजना में शामिल किया गया, तो राजधानी की तस्वीर आने वाले वर्षों में काफी बदल सकती है.
जनसुनवाई में यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि शहर का विकास किस दिशा में होना चाहिए. सुझाव देने वालों का कहना था कि केवल सड़कें चौड़ी करने और फ्लाईओवर बनाने से भविष्य की चुनौतियों का समाधान नहीं होगा. उन्होंने ऐसे विकास मॉडल की वकालत की, जिसमें नागरिकों की आवाजाही, स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को केंद्र में रखा जाए.
सुझावों में राजपुर रोड, आईएसबीटी और मोहकमपुर जैसे प्रमुख मार्गों पर सुरक्षित साइकिल ट्रैक विकसित करने की बात कही गई. साथ ही सार्वजनिक बस सेवाओं को इतना सुविधाजनक बनाने का सुझाव दिया गया कि लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें. इससे ट्रैफिक दबाव कम होने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलने की उम्मीद जताई गई.
जनसुनवाई में हर 300 मीटर पर पार्क या खुले हरित क्षेत्र विकसित करने का सुझाव भी रखा गया. लोगों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच हरियाली को संरक्षित करना आवश्यक है. इससे नागरिकों को बेहतर वातावरण मिलेगा और शहर का विकास केवल कंक्रीट संरचनाओं तक सीमित नहीं रहेगा.
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि यदि महायोजना-2041 केवल भवनों, प्लॉटों और सड़क परियोजनाओं तक सीमित रही, तो भविष्य में जाम, प्रदूषण और अव्यवस्थित शहरी विस्तार जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं. वहीं, यदि विकास की दिशा लोगों को केंद्र में रखकर तय की गई, तो देहरादून को अधिक स्वस्थ, संतुलित और रहने योग्य शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है.
जनसुनवाई में सामने आए सुझावों ने देहरादून के विकास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. नागरिकों का मानना है कि आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनहित को प्राथमिकता देने वाली योजना ही राजधानी के भविष्य को बेहतर बना सकती है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि महायोजना-2041 में इन सुझावों को किस रूप में शामिल किया जाता है.