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डिजिटल युग में भी गीताप्रेस की धार्मिक पुस्तकों की बढ़ी मांग, बिक्री में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी

डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-बुक्स की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद गीताप्रेस की धार्मिक पुस्तकों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2019-20 में जहां बिक्री 58.13 करोड़ रुपये थी.

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Edited By: Reepu Kumari
डिजिटल युग में भी गीताप्रेस की धार्मिक पुस्तकों की बढ़ी मांग, बिक्री में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी
Courtesy: Gemini

डिजिटल युग में जहां लोग तेजी से मोबाइल, इंटरनेट और ई-बुक्स की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं धार्मिक पुस्तकों के मामले में एक अलग तस्वीर सामने आई है. गीताप्रेस की मुद्रित पुस्तकों की मांग लगातार बढ़ रही है. हालिया आंकड़े बताते हैं कि धार्मिक साहित्य के प्रति लोगों का भरोसा आज भी मजबूत बना हुआ है. यही वजह है कि संस्थान की बिक्री पिछले छह वर्षों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है.

वर्ष 2019-20 में गीताप्रेस की पुस्तकों की बिक्री 58.13 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 138 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज हुई है जब डिजिटल माध्यमों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में पाठक आज भी धार्मिक ग्रंथों को मुद्रित रूप में पढ़ना और अपने संग्रह का हिस्सा बनाना पसंद कर रहे हैं.

धार्मिक पुस्तकों की मांग लगातार बढ़ी

गीताप्रेस की बिक्री के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पुस्तकों की मांग में लगातार वृद्धि हुई है. वर्ष 2020-21 में बिक्री 52.17 करोड़ रुपये रही, जबकि 2021-22 में यह बढ़कर 77.62 करोड़ रुपये हो गई. इसके बाद 2022-23 में 108.49 करोड़, 2023-24 में 135 करोड़, 2024-25 में 133 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड 138 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई.

101 करोड़ से ज्यादा प्रतियां हो चुकी हैं प्रकाशित

संस्थान दिसंबर 2025 तक विभिन्न धार्मिक पुस्तकों की 101 करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित कर चुका है. इनमें सबसे अधिक मांग श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस की रही. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, श्रीमद्भगवद्गीता की 1844 लाख और श्रीरामचरितमानस की 1321 लाख प्रतियां प्रकाशित की जा चुकी हैं. इसके अलावा पुराण, उपनिषद, भक्ति साहित्य, धार्मिक पुस्तिकाएं और संस्कार संबंधी पुस्तकों का भी व्यापक प्रकाशन हुआ है.

कम कीमत बनी सबसे बड़ी ताकत

गीताप्रेस की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण इसकी मूल्य नीति मानी जाती है. संस्थान धार्मिक पुस्तकों को लागत से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराता है, ताकि समाज के हर वर्ग तक धार्मिक साहित्य आसानी से पहुंच सके. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर बड़े शहरों तक इसके पाठकों का मजबूत आधार बना हुआ है. कम कीमत के साथ शुद्ध और प्रमाणिक सामग्री भी इसकी पहचान बनी हुई है.

डिजिटल दौर में भी नहीं बदली पाठकों की पसंद

ई-बुक्स और ऑनलाइन सामग्री की बढ़ती उपलब्धता के बावजूद धार्मिक पुस्तकों के मुद्रित संस्करणों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. बड़ी संख्या में लोग आज भी पूजा-पाठ और अध्ययन के लिए छपी हुई पुस्तकों को प्राथमिकता देते हैं. धार्मिक ग्रंथों को घर में सुरक्षित रखने और पारंपरिक रूप से पढ़ने की प्रवृत्ति ने गीताप्रेस की मांग को लगातार बनाए रखा है.

आस्था और गुणवत्ता ने कायम रखा भरोसा

बिक्री के बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी बदलाव के बावजूद धार्मिक साहित्य की उपयोगिता और महत्व बरकरार है. श्रद्धा, विश्वास, शुद्ध सामग्री और किफायती मूल्य ने गीताप्रेस को करोड़ों पाठकों की पसंद बनाए रखा है. यही कारण है कि डिजिटल क्रांति के दौर में भी संस्थान की पुस्तकों की मांग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है.