ट्रेनों पर लगातार सामने आने वाली पथराव की घटनाओं और रेलवे ट्रैक के आसपास होने वाले अपराधों पर रोक लगाने के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने का फैसला किया है. इसके तहत उन रेलखंडों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, जहां पहले ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. साथ ही स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षा तंत्र को और प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है.
इस अभियान के तहत ट्रैक किनारे बसे गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों, कुलियों और अन्य लोगों को पुलिस के सूचना नेटवर्क से जोड़कर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी. जीआरपी का उद्देश्य समय रहते घटनाओं को रोकना और ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
एसपी रेलवे लक्ष्मीनिवास मिश्र ने मंगलवार को अनुभाग के सभी थाना और चौकी प्रभारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक की. बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन रेलखंडों पर पहले पथराव की घटनाएं हुई हैं, उन्हें चिह्नित कर वहां लगातार निगरानी रखी जाए. साथ ही रेलवे ट्रैक के आसपास बसे गांवों के गणमान्य लोगों से बैठक कर उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग के लिए जागरूक किया जाए.
जीआरपी ने अधिकारियों से कहा है कि सी-प्लान के तहत रेलवे स्टेशन, ट्रेनों और रेल पटरियों के आसपास रहने वाले दुकानदारों, वेंडरों, कुलियों, संभ्रांत नागरिकों और जागरूक यात्रियों को सूचना तंत्र से जोड़ा जाए. इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी समय पर पुलिस तक पहुंच सकेगी और आवश्यक कार्रवाई में तेजी आएगी.
समीक्षा बैठक में थाना और चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए गए कि अपराधियों की फोटो और फिंगरप्रिंट का विवरण यक्ष एप पर अनिवार्य रूप से अपडेट कराया जाए. इसके अलावा ई-ऑफिस, ई-साक्ष्य और ई-समन प्रणाली का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सके.
जीआरपी ने अनुभाग से चलने वाली सभी ट्रेनों में स्कॉर्ट ड्यूटी की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि स्कॉर्ट टीम को रवाना करने से पहले शस्त्र, बॉडी-वॉर्न कैमरा, ब्लूटूथ स्पीकर सहित सभी जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं. साथ ही आवश्यक ब्रीफिंग के बाद ही टीम को ड्यूटी पर भेजा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा सके.
जीआरपी का मानना है कि तकनीक, स्थानीय सहयोग और बेहतर निगरानी व्यवस्था के जरिए ट्रेनों पर पथराव तथा रेलवे ट्रैक के आसपास होने वाली आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है. इसी उद्देश्य से डिजिटल निगरानी, सूचना तंत्र और स्कॉर्ट व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जा सके.