कानपुर और लखनऊ के बीच सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है. जाजमऊ स्थित पुराने गंगा पुल को जल्द ही करीब चार महीने के लिए पूरी तरह बंद किया जाएगा. पुल पर मरम्मत का दूसरा चरण शुरू होना है, जिसके चलते वाहनों की आवाजाही रोकना जरूरी माना गया है. इससे रोजाना इस मार्ग का उपयोग करने वाले हजारों यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक डायवर्जन की है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और प्रशासन अभी वैकल्पिक मार्ग को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. अधिकारियों का कहना है कि डायवर्जन की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही पुल को बंद किया जाएगा, ताकि मरम्मत का काम तय समय में पूरा हो सके.
एनएचएआई के अनुसार पुल के निचले हिस्से की मरम्मत पूरी हो चुकी है. अब ऊपरी हिस्से पर काम किया जाएगा, जिसमें 28 बेयरिंग बदलने के साथ अन्य तकनीकी मरम्मत शामिल है. इसके लिए प्रत्येक गर्डर को जैक की मदद से उठाया जाएगा. बाद में माइक्रो कंक्रीट और विशेष सामग्री से मरम्मत होगी तथा 28 दिन तक क्योरिंग की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी.
पुल बंद होने के बाद सबसे अधिक दिक्कत लखनऊ से कानपुर आने जाने वाले वाहनों को होगी. प्रशासन सरैंया क्रॉसिंग के रास्ते ट्रैफिक डायवर्ट करने पर विचार कर रहा है, लेकिन वहां रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अभी अधूरा है. इसके अलावा रेलवे फाटक बार बार बंद होने से लंबा जाम लगने की आशंका भी बनी हुई है.
स्थिति इसलिए और चुनौतीपूर्ण हो गई है क्योंकि उन्नाव के बक्सर गंगा पुल और रायबरेली के गेगासो गंगा पुल पर पहले से ही भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है. ऐसे में कानपुर और लखनऊ के बीच मालवाहक वाहनों के लिए फिलहाल कोई आसान वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है.
एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुल के ऊपरी हिस्से की मरम्मत के लिए ट्रैफिक डायवर्जन अनिवार्य है. प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है. जैसे ही वैकल्पिक रूट पर अंतिम फैसला होगा, उसके बाद पुल को यातायात के लिए बंद कर मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा.
अधिकारियों के मुताबिक पुल में कंपन की समस्या सामने आने के बाद विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत का निर्णय लिया गया. पहले चरण में ग्राउटिंग, कोटिंग और एंटी कोरोजन पेंट का काम पूरा हो चुका है. अब दूसरे चरण में बेयरिंग बदलने और ऊपरी हिस्से की मरम्मत के बाद पुल को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है.