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यूपी में खत्म होगा 64 साल पुराना शॉप एक्ट, ओएसएच कोड होगा लागू; महिला मजदूरों को मिलेगी नई सुविधा

उत्तर प्रदेश में छह दशक से अधिक समय से लागू शॉप एक्ट को समाप्त कर व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कोड लागू करने की तैयारी है. नए नियमों के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा.

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Edited By: Shanu Sharma
यूपी में खत्म होगा 64 साल पुराना शॉप एक्ट, ओएसएच कोड होगा लागू; महिला मजदूरों को मिलेगी नई सुविधा
Courtesy: AI

उत्तर प्रदेश में 1962 से लागू दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, जिसे आम तौर पर शॉप एक्ट कहा जाता है, जल्द ही इतिहास बनने वाला है. राज्य सरकार इसकी जगह व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कोड लागू करने की तैयारी कर रही है. इस बदलाव का सीधा असर प्रदेश के लाखों दुकानों, कार्यालयों, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा. 

नए नियम लागू होने के बाद इन सभी प्रतिष्ठानों को ओएसएच कोड के तहत पंजीकरण कराना होगा. नए ओएसएच कोड के अनुसार, जिन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके लिए श्रम विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. 

क्या कहता है शॉप एक्ट?

राज्य सरकार ने इससे पहले शॉप एक्ट में संशोधन करते हुए एक से 19 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट दे दी थी. केवल 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण जरूरी रखा गया था. अब नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है.

श्रम विभाग के अनुसार, शॉप एक्ट और ओएसएच कोड के नियमों में पंजीकरण को लेकर अलग-अलग प्रावधान होने से विरोधाभासी स्थिति बन गई थी. जहां वर्तमान व्यवस्था में 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को छूट प्राप्त है, वहीं ओएसएच कोड 10 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करता है.

केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि व्यापारियों को दोहरा पंजीकरण नहीं कराना होगा. इसी कारण श्रमायुक्त कार्यालय ने शॉप एक्ट समाप्त करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी.

कार्यस्थल पर बच्चों की देखभाल की सुविधा

राज्य सरकार ने वीबी जीरामजी योजना के तहत महिला मजदूरों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा भी शुरू की है. अब पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों वाली महिला मजदूरों को बच्चों को घर छोड़कर काम पर जाने की मजबूरी नहीं होगी. वे अपने बच्चों को कार्यस्थल पर साथ ला सकेंगी, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की जाएगी.

योजना के तहत यदि किसी कार्यस्थल पर पांच वर्ष से कम आयु के कम से कम पांच बच्चे मौजूद होंगे, तो उनकी देखभाल के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी. इस जिम्मेदारी के लिए महिला मजदूरों में से ही एक को नियुक्त किया जाएगा और उसे पूरे दिन की मजदूरी भी दी जाएगी.वहीं, ओएसएच कोड लागू होने से श्रम कानूनों को अधिक सरल और एकरूप बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.