मुंबई: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और दुनिया भर के बाजारों में मंदी के रुख ने घरेलू निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया. दोपहर साढ़े 12 बजे तक सेंसेक्स 653.28 अंक की गिरावट के साथ 77,527.44 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 भी 198.75 अंक फिसलकर 24,199.95 के स्तर पर आ गया.
मेटल, फार्मा और रियल एस्टेट को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख सेक्टर्स घाटे में कारोबार कर रहे थे.
कच्चे तेल पर निर्भर रहने वाली कंपनियों जैसे BPCL, HPCL, एशियन पेंट्स, इंडिगो और टायर कंपनियों पर भारी दबाव दिखा, क्योंकि तेल महंगा होने से उनका मुनाफा घटेगा. दूसरी तरफ, तेल के दाम बढ़ने से ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर 0.5% चढ़ गए. इसके अलावा, कल्याण ज्वेलर्स ने बेहतरीन तिमाही नतीजों के दम पर 5.4% की छलांग लगाई.
1. अमेरिका-ईरान में नया विवाद- अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों और हॉर्मुज जलडमरू में जहाजों पर हमले के बाद ईरान के तेल निर्यात लाइसेंस को रद्द करने से बाजार सहम गया है. इससे तेल की सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है.
2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें- ब्रेंट क्रूड 2.55% बढ़कर 76.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए महंगा तेल भारत का खर्च और देश में महंगाई दोनों बढ़ा सकता है.
3. विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी- बाजार गिरने के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs लगातार तीसरे दिन खरीदार बने रहे और उन्होंने मंगलवार को 393.19 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. हालांकि, यह खरीदारी बुधवार के डर को कम करने के लिए नाकाफी रही.
4. कमजोर ग्लोबल मार्केट- अमेरिकी बाजारों के गिरावट पर बंद होने के बाद एशियाई बाजारों में भी मंदी रही. जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी दोनों सूचकांक नीचे गिर गए.
5. इंडिया वीआईएक्स में उछाल- बाजार में उतार-चढ़ाव और जोखिम को मापने वाला इंडेक्स 'India VIX' 7% से ज्यादा उछलकर 12.47 पर पहुंच गया, जो यह दिखाता है कि निवेशक अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं.
6. डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया- जिओपॉलिटिकल तनाव और महंगे तेल के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसके कारण भारतीय रुपया 20 पैसे टूटकर 95.16 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया.
फिलहाल बाजार पूरी तरह से वैश्विक हालातों और युद्ध के तनाव के घेरे में है. आने वाले दिनों में शेयर बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका-ईरान का विवाद क्या मोड़ लेता है और कच्चे तेल की कीमतें कहां जाकर रुकती हैं.