"डीएम साहब, मैं जिंदा हूं"- यह लिखी तख्ती लेकर जिला कलेक्ट्रेट के बरामदे में कफन ओढ़े लेटे व्यक्ति का नाम इशहाक अली है. यह दृश्य उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का है, जहां डीएम ऑफिस के बाहर अचानक हड़कंप मच गया. लोगों ने जब एक बुजुर्ग को इस हालत में देखा तो सब हैरान रह गए. इशहाक अली ने अपने हाथ में तख्ती पकड़ रखी थी, जिस पर साफ शब्दों में लिखा था कि वह जिंदा हैं. दरअसल, यह व्यक्ति सरकारी अस्पताल में कर्मचारी था और 2019 में रिटायर हुआ, लेकिन उससे सात साल पहले ही रेवेन्यू रिकॉर्ड में इसे मृत बता दिया गया था.
इशहाक अली ने बताया कि 2 दिसंबर 2012 को तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक ने दस्तावेजों में गड़बड़ी करके उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद उनकी 0.770 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन गांव की एक महिला के नाम कर दी गई. इशहाक अली संतकबीर नगर के नाथनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीपर थे. 31 दिसंबर 2019 को जब वह सेवानिवृत्त हुए, तो उन्हें सम्मानजनक विदाई भी दी गई थी. लेकिन दफ्तर के कागजातों में वह पहले से ही मृत थे. यही विडंबना है कि एक व्यक्ति जिंदा होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में मृत चल रहा है, और इसकी वजह से उसकी अपनी जमीन तक छीन ली गई.
जिंदा हूं मैं!
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) April 17, 2026
बस्ती के इशहाक अली आज कफ़न ओढ़कर DM ऑफिस पहुंचे और खुद को जिंदा दिखाकर अफसरों की आँखें खोलने की कोशिश की है.
इशहाक अली सरकारी अस्पताल के कर्मचारी थे. 31 दिसंबर 2019 को उनका रिटायरमेंट हुआ लेकिन इससे ठीक 7 साल पहले राजस्व अभिलेखों में वह मर गए.
लेखपाल ने उनकी… pic.twitter.com/7CtBBolzYh
पिछले सात सालों से इशहाक अली अपने आप को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं. तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट तक, हर जगह उन्होंने गुहार लगाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई. हर बार उन्हें टालमटोल का जवाब मिला. जब वह थक-हारकर निराश हो गए, तो उन्होंने विरोध का अनोखा तरीका सोचा. उन्होंने कफन ओढ़ा और डीएम ऑफिस के बाहर लाश बनकर लेट गए. हाथ में तख्ती लिखी- 'डीएम साहब, मैं जिंदा हूं.' यह तस्वीर देखते ही बनती है कि एक बुजुर्ग को अपनी जिंदगी साबित करने के लिए मौत का नाटक करना पड़ रहा है.
इशहाक अली के इस रचनात्मक विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. लोग एक तरफ उनकी हिम्मत और अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कैसे एक जिंदा इंसान को रिकॉर्ड में मृत कर दिया जाता है? कैसे उसकी जमीन हड़प ली जाती है? और फिर सात साल तक कोई उसकी बात क्यों नहीं सुनता? अब देखना यह है कि डीएम साहब इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं. इशहाक अली को उम्मीद है कि अब उनकी आवाज जरूर सुनी जाएगी.