धार: मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर में मंगलवार को विशेष हवन, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए. हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को मां सरस्वती मंदिर मानने के बाद यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे. बताया जा रहा है कि पिछले 23 वर्षों में यह पहला मौका है जब परिसर में 'महासत्याग्रह' और 'महापूजा' का आयोजन किया गया.
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2003 के बाद पहली बार संशोधित नियमों के तहत पूजा-अर्चना कराई जा रही है. विशेष अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करेंगे. आयोजन समिति ने सनातन धर्मावलिंबयों से बड़ी संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद पुराने नियमों को हटाने और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
VIDEO | Dhar, Madhya Pradesh: Devotees offer prayers at Bhojshala complex amid tight security.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 19, 2026
A day after the Madhya Pradesh High Court ruled that Bhojshala in Dhar district was a temple of Goddess Saraswati, the Archaeological Survey of India (ASI) on Saturday granted the… pic.twitter.com/edogzb6RKl
भोजशाला उत्सव समिति के महाप्रबंधक हेमंत दौराया ने कहा कि भोजशाला एतिहासिक मां सरस्वती मंदिर है. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार में उत्सव जैसा माहौल है. उनके मुताबिक वर्ष 2003 से हर मंगलवार यहां हिंदू समाज सत्याग्रह करता आ रहा था और अब अदालत के फैसले के बाद यह पहला बड़ा सत्याग्रह आयोजित हुआ है.
उन्होंने कहा कि 23 वर्षों से चल रहे आंदोलन का उद्देश्य भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर साबित करना था. साथ ही उन्होंने कहा कि 'महासत्याग्रह' का उद्देश्य परिसर के 300 मीटर के दायरे में मौजूद मस्जिद और कब्रों को हटाने की मांग को आगे बढ़ाना है.
Dhar, Madhya Pradesh: Hindu groups held a victory celebration at the historic Bhojshala following the High Court verdict pic.twitter.com/gmmvy7OTjp
— IANS (@ians_india) May 19, 2026
शनिवार को हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है. फैसले के बाद हिंदुओं को अब पूरे वर्ष पूजा की अनुमति मिल गई है, जबकि पहले केवल मंगलवार को ही पूजा की इजाजत थी.
हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद पुरातत्व विभाग (ASI) का वह बोर्ड भी हट गया है जिस पर लिखा था कि परिसर में केवल मंगलवार को ही हिंदुओं को पूजा की अनुमति है और मुस्लिम शुक्रवार दोपहर को नमाज पढ़ सकेंगे.
हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज भोज परिसर में करीब 700 वर्षों के बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई. वहीं वर्ष 2003 के बाद पहली बार गर्भग्रह में मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापित की गई. भोजशाला आंदोलन से जुड़े तीन शहीदों की तस्वीरे भी गर्भग्रह में लगाई गई हैं.