नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रमुखों का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ. गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में ड्रग तस्करी के बदलते तरीकों पर चर्चा हुई. सरकार अब सिर्फ नशीले पदार्थ पकड़ने के बजाय तस्करी के पूरे नेटवर्क और उसकी फंडिंग पर कार्रवाई की तैयारी में है.
ड्रग तस्करों ने तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा दिया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती भी बदल गई है. सीमापार से नशीले पदार्थ पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल, इंटरनेट के छिपे नेटवर्क के जरिए सौदे और डिजिटल माध्यमों से भुगतान जैसे तरीके सामने आ रहे हैं. ऐसे नेटवर्क को रोकने के लिए एजेंसियों के बीच तकनीकी जानकारी और खुफिया सूचनाएं साझा करने पर जोर दिया जा रहा है.
सरकार की नई रणनीति में ड्रग्स की एक खेप पकड़ने से आगे बढ़कर पूरे सप्लाई नेटवर्क को निशाना बनाने की बात है. इसमें तस्करों के बीच कनेक्शन, सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली गुप्त लैब, सप्लाई चैन और अवैध कमाई के रास्तों की जांच शामिल है. 2026–2029 के विजन डॉक्यूमेंट में नेटवर्क और कार्टेल को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई को अहम हिस्सा बनाया गया है.
ड्रग तस्करी में क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की जांच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सरकार के विजन डॉक्यूमेंट में सभी ANTF में डार्कनेट और क्रिप्टो जांच से जुड़ी क्षमता विकसित करने, आधुनिक तकनीक और AI आधारित विश्लेषण के इस्तेमाल की योजना बताई गई है. इसका उद्देश्य ऑनलाइन चल रहे संगठित ड्रग नेटवर्क तक पहुंचना है.
सरकार का जोर राज्यों की पुलिस, ANTF, NCB और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर है. 22 सितंबर को हुए तीसरे राष्ट्रीय ANTF सम्मेलन में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. दो दिवसीय सम्मेलन में ड्रग कार्टेल, सिंथेटिक ड्रग्स, गुप्त लैब, डार्कनेट और क्रिप्टो जांच जैसे मुद्दों पर रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई.