No Horn Day: बिहार की राजधानी पटना में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. बोर्ड ने ऐलान किया है कि हर रविवार को ‘नो हॉर्न डे’ मनाया जाएगा, जिसमें वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे अपने वाहनों का हॉर्न न बजाएं, ताकि शहरवासियों को शोर से राहत मिल सके. यह पहल 30 जुलाई 2025 से शुरू हो चुकी है और 2 अक्टूबर 2025 तक जागरूकता अभियान के साथ इसे और प्रभावी बनाया जाएगा.
पटना में अनावश्यक हॉर्न बजाने की प्रवृत्ति आम है, जो न केवल परेशानी का कारण बनती है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देती है. बोर्ड के अनुसार, 65 डेसिबल से अधिक ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण माना जाता है, और 75 डेसिबल से अधिक ध्वनि हानिकारक होती है. पटना के आवासीय और शांत क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण का स्तर औसतन 80 डेसिबल से अधिक पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2 अक्टूबर 2025 तक शहर को चार जोनों में बांटकर एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत नो हॉर्न डे को बढ़ावा देने और अनावश्यक हॉर्न बजाने से रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है. बोर्ड ने यह भी सलाह दी है कि आपातकालीन स्थिति को छोड़कर, सामान्य दिनों में भी हॉर्न का उपयोग कम से कम करें.
पटना में कुछ क्षेत्रों को ‘शांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है, जिनमें न्यायालय, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सचिवालय, विधानमंडल, राजभवन, जैविक उद्यान शामिल हैं. इन क्षेत्रों के 100 मीटर के दायरे में हॉर्न, लाउडस्पीकर, डीजे या अन्य शोर उत्पन्न करने वाले उपकरणों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है. रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे का उपयोग भी वर्जित है.