नई दिल्ली: वेनेजुएला की राजधानी काराकास और आसपास के शहर उस वक्त अचानक ठहर गए, जब अमेरिका ने हवाई हमले किए. इसके बाद अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपनी हिरासत में ले लिया. हमलों में बिजली, संचार और परिवहन ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ. शहरों में अंधेरा छा गया, दुकानों के शटर गिर गए और सड़कों से लोग गायब हो गए. स्थानीय लोग इसे अपने जीवन का सबसे डरावना दौर बता रहे हैं.
हमलों का सबसे बड़ा असर काराकास के हवाई अड्डे, शहर से करीब सौ किलोमीटर दूर स्थित सबसे बड़े सैन्य एयरबेस और फुएर्ते तिउना क्षेत्र पर पड़ा. भारतीय समुदाय के सदस्य सुनील मल्होत्रा के अनुसार, फुएर्ते तिउना में भारी नुकसान हुआ, क्योंकि वहीं से राजधानी की मुख्य बिजली आपूर्ति होती है. इसी कारण बड़े इलाकों में अंधेरा फैल गया और प्रशासन भी हालात संभालने में असमर्थ दिखा.
हमलों के तुरंत बाद सार्वजनिक परिवहन रोक दिया गया. काराकास लगभग ठहर सा गया. लोग डर के कारण घरों से बाहर नहीं निकले. अधिकांश सुपरमार्केट बंद थे. केवल छोटे मोहल्ले की दुकानें, जिन्हें हम भारत में किराना स्टोर कहते हैं, खुली थी और वहां लंबी-लंबी कतारें लगी थी. हर ब्लॉक में पांच सौ से ज्यादा लोग दिखे, लेकिन दुकानदार एक या दो लोगों को ही अंदर आने दे रहे थे.
ब्रेड बेचने वाली दुकानों के बाहर सबसे लंबी लाइनें दिखीं. मल्होत्रा ने बताया कि फिलहाल पूरी तरह खाद्य संकट नहीं है, लेकिन घबराहट के कारण लोग जमा करने लगे हैं. फार्मेसियों में भी भारी भीड़ है, क्योंकि यहां डिब्बाबंद खाना जैसे टूना, सार्डिन और हैम मिलते हैं. लोगों को डर है कि हालात और बिगड़े तो आपूर्ति रुक सकती है.
कई अन्य लोगों की तरह, सुनील मल्होत्रा को भी अपना फोन चार्ज करने के लिए जगह ढूंढने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी, जो कि एक अवैध व्यवस्था थी और घंटों इंतजार करना पड़ा. बिजली गुल होने से लोगों के लिए मोबाइल चार्ज करना भी चुनौती बन गया. मल्होत्रा को कई किलोमीटर पैदल चलकर एक स्ट्रीटलाइट तक जाना पड़ा, जहां अवैध तरीके से बिजली ली जा रही थी. हॉट डॉग विक्रेताओं ने तार जोड़ रखे थे और लोग वहीं फोन चार्ज कर रहे थे. शाम चार बजे पहुंचे मल्होत्रा रात ग्यारह बजे लौट पाए. पुलिस ने भीड़ से हटने को कहा, लेकिन बिजली बहाली का समय नहीं बताया.
भारतीय दूतावास ने व्हाट्सएप के जरिए नागरिकों को दिशा निर्देश दिए हैं. उधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हुई कार्रवाई को वेनेजुएला ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए अपने संसाधनों पर कब्जे की साजिश करार दिया है.