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रूसी जहाज पर ब्लास्ट में अमेरिका का हाथ? रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

स्पेन के पास में एक साल पहले बीच समुद्र में रूस के जहाज में विस्फोट हुआ था. रूस ने इसके पीछे अमेरिका का हाथ बताया था. हालांकि अब सामने आ रहे रिपोर्ट में बड़ा खुलासाहुआ है.

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Edited By: Shanu Sharma
रूसी जहाज पर ब्लास्ट में अमेरिका का हाथ? रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
Courtesy: X (@RWApodcast)

नई दिल्ली: स्पेन के कार्टाजेना के नजदीक एक साल से भी पहले रूसी जहाज पर एक बड़े हादसे की खबर आई थी. यह हादसा 23 दिसंबर 2024 को हुआ था, इस दौरान एक विस्फोट के बाद रूसी जहाज समुद्र में डूब गया था. रूस की ओर से इसे अमेरिकी साजिश बताया गया था. हालांकि इस घटना पर एक साल से ज्यादा समय बाद हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है. 

स्पेन में छपे अखबार ला वर्डाड में इसके जांच का खुलासा किया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक जिस रूसी जहाज में विस्फोट हुआ, उसमें दो VM-4SG न्यूक्लियर रिएक्टर के केसिंग (हाउसिंग) छिपे हुए थे. ये नार्थ कोरिया जा रहे थे. हालांकि रूस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इसमें केवल आइसब्रेकर के पार्ट्स और खाली कंटेनर बताए गए थे. लेकिन जांच में साफ हुआ कि दो नीले रंग के बड़े कंटेनर भी जहाज पर मौजूद थे. 

जहाज में न्यूक्लियर रिएक्टर मौजूद

जहाज में हुए विस्फोट के बाद इस मामले की जांच शुरू कर दी गई. हर एक एंगल से जांच किए गए, इसके पीछे अमेरिका का हाथ बताया जा रहा है था. लेकिन सामने आए रिपोर्ट ने सबकुछ बदल कर रख दिया. हवाई फोटो और सभी क्रू मेंबर से पूछताछ में कई जानकारी सामने आई. इसमें पता चला की जहाज पर VM-4SG न्यूक्लियर रिएक्टर के केसिंग और संबंधित पार्ट्स भी ले जाए जा रहे थे. बता दें कि  VM-4SG रूस का अपग्रेडेड न्यूक्लियर रिएक्टर है. इसका इस्तेमाल प्रोजेक्ट 667BDRM डेल्टा IV SSBN सबमरीन में किया जाता है. 

क्या है जहाज विस्फोट की पूरी घटना?

रूसी जहाज पर हुए इस हादसे को एक बार फिर से याद करें तो, 23 दिसंबर 2024 को स्पेन के कार्टाजेना से 60 नॉटिकल मील दूर जहाज पर विस्फोट हुआ. इस दौरान एक नहीं बल्कि एक के बाद एक तीन विस्फोट हुए थे. जिसके बाद जहाज डूब गया और इस हादसे में 16 क्रू मेंबर्स में से केवल 14 को बचाया जा सका. वहीं दो लोगों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल सका. जहाज की जब जांच शुरू की गई तब उसमें 50 सेमी x 50 सेमी का एक गोल आकार में छेद मिला.

इसका किनारा अंदर की ओर था. हालांकि जानकारी आने से पहले तक रूस इस विस्फोट को आतंकी हमला बता रहा था. रूस ने जवाबी कार्रवाई करने की धमकी भी दी थी. उनका मानना था कि यह अमेरिका या नाटो की सबमरीन का गुप्त हमला था. हालांकि रिपोर्ट कुछ और बता रहा है. रूस ने कुछ सवाल भारत के INS अरिहंत क्लास SSBN पर भी उठाया था. लेकिन भारत ने इस पर साफ जवाब देते हुए कहा था कि हमारे पास अपना रिएक्टर CLWR-B1 है.