नई दिल्ली: वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मंजूर एक ऑपरेशन के तहत पकड़ कर अमेरिकाय ले आया है. इसके बाद अब सामने आ रही जानकारी के मुताबिक मादुरो को अगले हफ्ते एक फेडरल कोर्ट में पेश किया जाएगा. हालांकि इस बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन बताया जा रहा है कि ड्रग्स और हथियारों के आरोप लगाए गए हैं.
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें उन्होंने बताया कि मादुरो और फ्लोरेस पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में आरोप लगाए गए हैं. बॉन्डी ने कहा कि मादुरो पर नार्को-टेररिज्म की साजिश, कोकीन आयात की साजिश, मशीन गन और विनाशकारी उपकरणों का कब्जा और अमेरिका के खिलाफ मशीन गन और विनाशकारी उपकरणों पर कब्जा करने की साजिश का आरोप लगाया गया है.
बॉन्डी ने कहा कि मादुरो को जल्द ही अमेरिकी धरती पर अमेरिकी अदालतों में अमेरिकी न्याय के पूरे गुस्से का सामना करना पड़ेगा. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन के अगले कदम का खुलासा किया. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सरकार देश को चलाने में मदद करेगी और पहले से ही ऐसा कर रही है. पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका देश के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेगा और दूसरे देशों को बड़ी मात्रा में तेल बेचेगा.
वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने एक भाषण में मांग की कि अमेरिका मादुरो को रिहा करे. वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने डेल्सी को अंतरिम राष्ट्रपति की भूमिका संभालने का आदेश दिया है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने किसी लैटिन अमेरिकी देशों के साथ ऐसा किया हो. आज से 36 साल पहले पनामा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था.
अमेरिका ने पनामा पर भी अचानक हमला किया था और उसके तत्कालीन शासक मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार किया था. मैनुअल नोरिएगा समय मिलिट्री इंटेलिजेंस का नेतृत्व कर रहे थे. कहा यह भी जाता है कि मैनुअल उस समय CIA के पेरोल पर थे लेकिन पनामा के वास्तविक नेता बन गए. हालांकि उस समय मैनुअल वाशिंगटन के सहयोगी थे. उन्होंने सेंट्रल अमेरिका में कम्युनिज्म को रोकने में मदद की थी, लेकिन बाद में कोलंबियाई ड्रग लॉर्ड्स के साथ शामिल हो गए थे. कहा जाता है कि मैनुअल ने ड्रग लॉर्ड्स को कोकीन की तस्करी करने और पनामा के बैंकों के जरिए ड्रग्स के पैसे को सफेद करने में मदद की. बदले में, उन्हें रिश्वत के तौर पर लाखों डॉलर मिले.
हालांकि अमेरिकी इंटेलिजेंस को इस बात का अंदाजा था, लेकिन वॉशिंगटन की कम्युनिज्म के खिलाफ लड़ाई में उसकी अहमियत की वजह से वे चुप रहे. आखिरकार अमेरिका ने उसे अपना मानने से इनकार कर दिया और उस पर अमेरिकी फेडरल कोर्ट में ड्रग तस्करी के आरोप लगाए गए. बाद में मैनुअल चुनाव जीत कर अमेरिका के साथ युद्ध का ऐलान कर दिया. फिर अमेरिका ने 'ऑपरेशन जस्ट कॉज' शुरू किया और पनामा में घुस कर मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार कर लिया.