नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रही सैन्य झड़पों के कम होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं. इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है. सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जबकि दुनिया भर के शेयर बाजार दबाव में नजर आए. निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश साधनों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है.
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब साढ़े सात प्रतिशत उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. वहीं अमेरिकी क्रूड भी सात प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 71 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. सोने की कीमत में भी डेढ़ प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. यह साफ संकेत है कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है.
पूरी दुनिया की नजर इस समय होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई है. यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. इसके अलावा वैश्विक तरलीकृत गैस की बड़ी मात्रा भी इसी मार्ग से जाती है.
फिलहाल यह रास्ता बंद नहीं हुआ है, लेकिन समुद्री ट्रैकिंग आंकड़े बताते हैं कि कई तेल टैंकर इस क्षेत्र के आसपास रुक गए हैं. हमलों की आशंका और बीमा से जुड़ी दिक्कतों के कारण जहाज मालिक सतर्क रुख अपना रहे हैं. यदि यह मार्ग कुछ समय के लिए भी बाधित होता है तो रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक तेल की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है.
तेल की कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी का मतलब है कि दुनिया भर में महंगाई का दबाव दोबारा बढ़ सकता है. ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा.
इससे कारोबार और उपभोक्ताओं दोनों पर बोझ बढ़ेगा. जब खर्च बढ़ता है तो मांग घटने लगती है और इसका असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है. यही वजह है कि निवेशक बेहद सतर्क हो गए हैं.
एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. जापान का प्रमुख सूचकांक दो प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया. दक्षिण कोरिया में भी गिरावट देखी गई. यूरोप में प्रमुख सूचकांक फ्यूचर स्तर पर ही नीचे रहे. अमेरिका में भी प्रमुख सूचकांकों के फ्यूचर में गिरावट दर्ज की गई. बैंकिंग और टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव ज्यादा दिखाई दिया.
निवेशक जोखिम भरे एसेट से निकलकर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में पैसा लगा रहे हैं. दस साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई.