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India Daily

टैरिफ पॉलिटिक्स पर ट्रंप की अग्निपरीक्षा, सुप्रीम कोर्ट ने अवैध माना तो खाली होगा अमेरिका का खजाना

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर 9 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा. भारत सहित सौ से अधिक देश प्रभावित हैं. निर्णय से वैश्विक व्यापार दिशा और अमेरिकी खजाने पर बड़ा असर पड़ सकता है.

Kanhaiya Kumar Jha
टैरिफ पॉलिटिक्स पर ट्रंप की अग्निपरीक्षा, सुप्रीम कोर्ट ने अवैध माना तो खाली होगा अमेरिका का खजाना
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को राजनीतिक औजार बनाया है. उनके फैसलों ने मित्र और साझेदार देशों में भी चिंता बढ़ाई. भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद दबाव में हैं. अब 9 जनवरी की रात अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आपात शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ वैध हैं या नहीं. फैसला वैश्विक बाजारों और द्विपक्षीय रिश्तों की दिशा तय कर सकता है. 

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फैसलों से व्यापार नीति को सख्त बनाया है. अमेरिका ने 100 से अधिक देशों से आने वाले सामान पर ऊंचे टैरिफ लगाए. भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क ने कई उद्योगों की लागत बढ़ा दी. स्टील, केमिकल और इंजीनियरिंग उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. इन कदमों का मकसद घरेलू उद्योग को संरक्षण देना बताया गया है, लेकिन विरोध भी तेज हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट में कानूनी परीक्षा

मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा क्योंकि सवाल अधिकार का है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि IEEPA कानून के तहत इतने व्यापक टैरिफ नहीं लगाए जा सकते. कोर्ट यह देखेगा कि क्या प्रशासन ने आपात शक्तियों की सीमा लांघी. यह फैसला भविष्य में राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियों की व्याख्या भी तय कर सकता है.

फैसला उलटा तो आर्थिक झटका

अगर कोर्ट ने टैरिफ को अवैध माना तो सरकार को इंपोर्टर्स को रिफंड देना पड़ सकता है. अनुमानित राशि 100 से 150 अरब डॉलर तक बताई जा रही है. यह अमेरिकी खजाने पर भारी बोझ होगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा नतीजा बजट और बाजारों दोनों को झटका दे सकता है, इसलिए कोर्ट बीच का रास्ता भी चुन सकता है.

भारत पर सीधा असर

भारत के लिए यह फैसला बेहद अहम है. 50 प्रतिशत टैरिफ से निर्यात घटा और कीमतें बढ़ीं. दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन अनिश्चितता बनी है. हाल में ट्रंप ने रूस से तेल खरीद पर आपत्ति जताई थी और टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी. इससे रणनीतिक दबाव और बढ़ा है.

आगे की रणनीति क्या होगी?

सूत्रों के मुताबिक ट्रंप की टीम वैकल्पिक कानूनी रास्तों पर काम कर रही है. अगर फैसला खिलाफ आया तो अन्य कानूनों के जरिए शुल्क बनाए रखने की कोशिश हो सकती है. इसलिए परिणाम ऑल ऑर नथिंग नहीं रहने की संभावना है. जो भी निर्णय होगा, उसका असर वैश्विक व्यापार नियमों और अमेरिका की नीति दिशा पर लंबे समय तक दिखेगा.