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India Daily

नेतन्याहू की धमकी से खौफ में आया पाकिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को हुआ गलती का ऐहसास? डिलीट करना पड़ा पोस्ट

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को इजरायल विरोधी पोस्ट डिलीट करना पड़ा.

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Edited By: Reepu Kumari
नेतन्याहू की धमकी से खौफ में आया पाकिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को हुआ गलती का ऐहसास? डिलीट करना पड़ा पोस्ट
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच हो रही शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है. ठीक इसी दौरान उसके रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की इजरायल के खिलाफ तीखी टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस पर तेज प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा. आसिफ को अपना पोस्ट डिलीट करने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस घटना को कूटनीतिक झुकाव के तौर पर देखा जा रहा है.

पोस्ट डिलीट करने की विवशता

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने एक्स अकाउंट पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ बताया था. नेतन्याहू के कार्यालय ने इसे ‘अपमानजनक’ करार दिया और साफ कहा कि ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकती. खासतौर पर तब जब पाकिस्तान खुद को शांति वार्ता का निष्पक्ष मध्यस्थ बता रहा है.

कूटनीतिक सरेंडर की चर्चा

यह घटना पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी का विषय बन गई है. इजरायल की कड़ी फटकार के बाद तुरंत पोस्ट हटाने का फैसला पाकिस्तान की कमजोर कूटनीतिक स्थिति को उजागर करता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय किसी भी बड़े विवाद से बचना पाकिस्तान की मजबूरी है. 

वार्ता की मेजबानी पर असर

अमेरिका-ईरान वार्ता को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान पूरी कोशिश कर रहा है. ऐसे में रक्षा मंत्री का यह विवाद देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है. पाकिस्तान अब खुद को जिम्मेदार और संतुलित खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश में लगा है. 

पाकिस्तान की छवि पर लगा धब्बा

विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल के साथ इस तीखे टकराव ने पाकिस्तान की मध्यस्थ वाली भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है. जो देश शांति का दूत बनने का दावा कर रहा था, उसी के मंत्री का बयान देश की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रहा है.

भविष्य में सावधानी बरतने की जरूरत

इस घटना से साफ है कि पाकिस्तान को अब शांति वार्ता के दौरान हर बयान और कदम को बेहद सावधानी से उठाना होगा. कोई भी छोटी सी गलती पूरे कूटनीतिक प्रयास को नुकसान पहुंचा सकती है.