नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजधानी में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले सुरक्षा की चिंताएं आसमान छू रही हैं. व्हाइट हाउस के पूर्व प्रेस सचिव एरी फ्लेशर ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिकी वार्ताकारों, खासकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए. उन्होंने पाकिस्तान की स्थिति को लेकर गहरी आशंका जताई है.
फ्लेशर का कहना है कि पाकिस्तान में सरकार का पूरा नियंत्रण नहीं है और वहां की स्थिति बेहद नाजुक है. ऐसी जगह पर उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा बड़ी चुनौती बन सकती है.
एरी फ्लेशर ने अतीत के उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि पाकिस्तान की यात्राएं कभी आसान नहीं रही हैं. पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को अपनी यात्रा के दौरान डेकॉय एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करना पड़ा था. गुप्त रूप से विमान बदलकर उनकी लोकेशन छिपाई गई थी. 2006 में राष्ट्रपति बुश की यात्रा के दौरान सीक्रेट सर्विस भी इसके खिलाफ थी.
दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसे स्थायी बनाने के लिए इस्लामाबाद में बैठक रखी गई है. लेकिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि लेबनान पर इजरायली हमले युद्धविराम का उल्लंघन हैं. तेहरान ने साफ चेतावनी दी कि अगर हमले नहीं रुके तो बातचीत बेकार हो जाएगी.
पाकिस्तान सरकार वार्ता को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी में जुट गई है. इस्लामाबाद को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में बदल दिया गया है. भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और कूटनीति के बीच यह संतुलन बनाना आसान नहीं होगा.
फ्लेशर ने इस पूरे मिशन को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और सैन्य सुरक्षा बलों के लिए बड़ी परीक्षा बताया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान जैसी जगह पर उच्चस्तरीय वार्ता का आयोजन जोखिम भरा फैसला है. पूरी दुनिया इस वार्ता के नतीजे का इंतजार कर रही है.
अगर यह वार्ता सफल रही तो पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है. लेकिन सुरक्षा की चुनौतियां और क्षेत्रीय तनाव इसे जटिल बना रहे हैं. फिलहाल सबकी निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हुई हैं.