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India Daily

Pakistan Israel Relation: ट्रंप के दबाव में फंसा पाकिस्तान, ख्वाजा आसिफ बोले- इजरायल मंजूर नहीं; अब्राहम अकॉर्ड्स में नहीं जा सकते

डोनाल्ड ट्रंप की अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील पर पाकिस्तान असमंजस में फंस गया है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ कहा कि पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा और इस समझौते में शामिल होना उसकी विचारधारा के खिलाफ है.

Dhiraj Kumar Dhillon
Pakistan Israel Relation: ट्रंप के दबाव में फंसा पाकिस्तान, ख्वाजा आसिफ बोले- इजरायल मंजूर नहीं; अब्राहम अकॉर्ड्स में नहीं जा सकते
Courtesy: Google

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर “चौधरी” बनने की जुगत में लगा पाकिस्तान बुरी तरह फंस गया है. पा‌किस्तान इजरायल के साथ राजन‌यिक संबंध बहाल करने को लेकर पशोपेश में फंस गया है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अरब और मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील है. यह मामला पाकिस्तान से न तो उगलते बन रहा है और न ही निगलते बन रहा है. दो दिन पहले ट्रंप ने जब अरब और मुस्लिम देशों के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल में यह बात रखी तो पाकिस्तान की उसी समय सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई थी, ट्रंप ने ‌खुद तंज कसते हुए कहा था पाकिस्तान कॉल पर बना हुआ है या छोड़कर निकल गया. अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान से यह मुद्दा एक बार फिर गर्माने लगा है.

ट्रंप की अपील पर क्या बोले ख्वाजा आसिफ?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने समा टीवी पर इंटरव्यू के दौरान साफ कहा है कि इस्लामाबाद को ट्रंप की अपील के सामने नहीं झुकना चाहिए. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का यह प्रस्ताव हमारी विचारधारा से मेल नहीं खाता. बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इजरायल और अरब देशों के बीच डिप्लोमेटिक और कमर्शियल रिश्ते बहाल करने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स बनवाया था. ट्रंप के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े यूएई और बहरीन पहले अब्राहम अकॉर्ड्स के मेंबर हैं. ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, तुर्की, मिश्र और जॉर्डन भी इसमें शामिल हों.

बोले- पा‌किस्तान को इजरायल मंजूर नहीं

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इंटरव्यू के दौरान कहा है कि व्यक्तिगत रूप से मैं नहीं मानता कि हमें इस अकॉर्ड्स में शामिल होना चाहिए. क्योंकि हमारी विचारधारा अलग है. उन्होंने कहा कि इजरायल जब तक पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी बनाकर फिलिस्तीनी देश नहीं बन जाता, तब तक पाकिस्तान इजरायल को एक देश की तरह स्वीकार नहीं कर सकता. इस्लामाबाद ने आज तक ईजरायल को मान्यता नहीं दी, तो अब ऐसा क्या हो गया? उन्होंने दो टूक कहा, हम अपने रुख पर कायम है, इजरायल हमें मंजूर नहीं है. उन्होंने यहां तक कहा कि अब्राहम समझौते में शामिल होने का पाकिस्तान में सियासी और आवामा के स्तर पर बड़ा विरोध होगा.

इजरायल को इंसानियत के लिए श्राप बताया था

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री पहली बार इजरायल के खिलाफ बोले हों, ऐसा नहीं है. पिछले महीने ही ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को इंसानियत के लिए श्राप बताया था. उन्होंने सवाल किया है कि जो लोग भरोसे के लिए लायक ही नहीं हैं, इस समझौते में शामिल होकर उनके साथ कैसे बैठेंगे? ख्वाजा आसिफ यहूदे देश के साथ रिश्ते सामान्य करने के विचार को हमेशा विरोध करते रहे हैं, लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरान के सामने अब बड़ी समस्या इस बात की आ रही है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद जारी तनाव को कम करने की कोशिशों पर पानी न फिर जाए.