IPL 2026 के प्लेऑफ का पहला मुकाबला धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जाएगा. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच होने वाले क्वालीफायर-1 मुकाबले में पिच दोनों टीम के लिए बड़ी जंग बनकर उभरेगी. पहाड़ों के बीच बसे इस मैदान पर अक्सर मैच का रुख टॉस से ही बदल जाता है. इसलिए जिस भी टीम ने टॉस जीता, उसके पास मैच जीतने का सबसे ज्यादा चांस है.
धर्मशाला की ठंडी हवा और उछाल भरी पिच तेज गेंदबाजों के लिए काफी फायदेमंद होती है. आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 76 फीसदी विकेट पेसर्स ने लिए हैं. वहीं स्पिन गेंदबाजों को सिर्फ 24 फीसदी सफलता मिली है. नई गेंद से स्विंग और सीम मूवमेंट बल्लेबाजों को शुरुआत में परेशान कर सकती है. इस मुकाबले में भी भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, कगिसो रबाडा और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज मैच का रुख बदल सकते हैं.
धर्मशाला में अब तक खेले गए T20 मैचों में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों का पलड़ा हमेशा भारी रहा है. यहां लगभग 60% से 65% मुकाबले उस टीम ने जीते हैं, जिसने दूसरी पारी में बैटिंग की है. इसलिए टॉस जीत कर गेंदबाजी करने वाली टीम का पास फाइनल का रास्ता साफ हो सकता है. वहीं जो भी कप्तान यहां टॉस जीतता है, वह 100 में से 99 बार पहले गेंदबाजी चुनने में ही भलाई समझता है. आज RCB या GT में से जो भी कप्तान टॉस जीतेगा, वो सीधा फील्डिंग चुनेगा और उसके मैच जीतने के चांस टॉस के साथ ही काफी बढ़ जाएंगे.
धर्मशाला की पिच पर अच्छा बाउंस मिलता है. यह स्टेडियम समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर है, इसलिए यहां हवा का फ्लो बहुत तेज रहता है. शुरुआती 4-5 ओवरों में तेज गेंदबाजों को हवा में जबरदस्त स्विंग मिलेगी. टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों को शुरुआत में संभलकर खेलना होगा.
शुरुआती स्विंग का खतरा टलने के बाद यह पिच बैटिंग के लिए एकदम फलैट हो जाती है. यहां की आउटफील्ड बहुत तेज है. ऊंचाई के कारण गेंद हवा में बहुत तेजी से ट्रैवल करती है. अगर विराट या शुभमन जैसे बल्लेबाज सेट हो गया, तो चौके-छक्कों की बरसात तय है. यहां पहली पारी का औसतन स्कोर 170-180 के आसपास रहता है.
धर्मशाला में शाम ढलते ही ओस गिरना लगभग तय है. दूसरी पारी में ओस के कारण गेंद गीली हो जाती है. इससे स्पिनर्स को ग्रिप करने में दिक्कत होती है. गेंद बल्ले पर बहुत अच्छे से आती है. यही कारण है कि टॉस जीतकर बाद में बैटिंग करना यहां सबसे सेफ माना जाता है.