अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी लोगों में से एक अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का 71 साल की उम्र में निधन हो गया. मिल रही जानकारी के मुताबिक ग्राहम कुछ दिनों से बीमार थे, जिसके इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ग्राहम का निधन तब हुआ, जब वह सीनेट में अपने पांचवें कार्यकाल की तैयारी कर रहे थे.
लिंडसे ग्राहम के ऑफिस की ओर से शेयर किए गए पोस्ट में कहा गया कि सीनेटर ग्राहम का परिवार इस समय लोगों की प्रार्थनाओं का आभारी है और इस बेहद मुश्किल दौर में निजता बनाए रखने का अनुरोध करता है. वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके निधन पर दुख जताया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि मैं जिन्हें जानता हूं, उनमें से वे सबसे बेहतरीन लोगों और सीनेटरों में से एक थे. वे हमेशा काम में लगे रहते थे और एक सच्चे देशभक्त भी थे, जिनकी हमें बहुत याद आएगी. उनका जाना बेहद दुखद है. बता दें कि रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य लिंडसे ग्राहम को 2002 में पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुना गया था. इसके बाद से वह लगातार इस पद के लिए चुने जाते रहे थे. राजनीति में आने से पहले वह अमेरिकी वायु सेना में एक वकील के तौर पर काम किया करते थे. हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान लिंडसे विदेश नीति मामलों में खुलकर बयान देने लगें. उन्होंने भारत पर लगाए गए टैरिफ, रूस-यूक्रेन तनाव और ईरान के साथ अमेरिका के चल रहे तनाव पर कई महत्वपूर्ण बयान दिए थे.
लिंडसे ग्राहम उन रिपब्लिकन नेताओं में एक थे, जिन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध की वकालत की थी. हालांकि, यह पहला मौका नहीं था जब उन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की वकालत की थी. इससे पहले भी वह हमेशा से ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने वाली नीतियों का समर्थन करते रहे थे. उन्होंने बराक ओबामा के समय पर हुए ईरान परमाणु डील को भी मानने से इनकार कर दिया था. वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच कुछ दिनों पहले हुए समझौते को लेकर भी उन्होंने अनिश्चितता जताई थी और कहा था कि यह समझौता कितना संभव है, इसके बारे में अभी नहीं कहा जा सकता है.
लिंडसे और ट्रंप इसलिए भी काफी करीबी थे, क्योंकि दोनों की विचार मिलते थे. पिछले साल जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, तब भी उन्होंने उसका समर्थन करते हुए कहा था कि उन खरीदारों पर जरूर टैरिफ लगना चाहिए, जिनकी वजह से मॉस्को को युद्ध लड़ने में बढ़ावा मिल रहा है. इसके लिए उन्होंने भारत के साथ-साथ चीन और अन्य देशों पर टैरिफ लगाने का पूरा समर्थन किया था. उनके अचानक निधन की खबर ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरे विश्व का ध्यान खिंचा है.