उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में चौक थाना पुलिस ने सुड़िया निवासी कारोबारी विपुल अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि कारोबारी ने अपनी फर्म का चालू बैंक खाता कथित तौर पर एक फीसदी कमीशन के बदले दूसरे लोगों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया था. इस मामले में पूछताछ के आधार पर चार अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है.
पुलिस के अनुसार, कारोबारी के खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा था. जांच में करीब 1.88 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है.
चौक थाना पुलिस और साइबर सेल को लखनऊ स्थित मुख्यालय से येलो-16 म्यूल अकाउंट अभियान के तहत एक संदिग्ध चालू खाते की जानकारी मिली थी. इसके बाद पुलिस टीम कारोबारी के लक्सा क्षेत्र स्थित सूरजकुंड इलाके में पहुंची और उससे पूछताछ की.
पूछताछ के दौरान विपुल अग्रवाल ने बताया कि उसकी पहचान मोबाइल के माध्यम से ईशान ठाकुर नाम के व्यक्ति से हुई थी. बाद में उसका संपर्क ब्रजेश, राजवीर और रोहित ठाकुर से भी हुआ. इन लोगों ने खुद को एक ट्रेडिंग कंपनी का संचालक बताते हुए खाते के इस्तेमाल के बदले एक फीसदी कमीशन देने का प्रस्ताव रखा.
विपुल लक्सा क्षेत्र में प्लास्टिक डमी का कारोबार करता है. इन डमी का उपयोग कपड़ों के शोरूम और दुकानों में वस्त्रों के प्रदर्शन के लिए किया जाता है. पुलिस के अनुसार, कारोबारी ने अपनी इसी फर्म का चालू बैंक खाता दूसरे लोगों को सौंप दिया, जिसके बाद में साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल हुआ. हालांकि, कारोबारी का दावा है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि खाते का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया जाएगा. उसका कहना है कि उसे केवल ट्रेडिंग कंपनी के वित्तीय लेनदेन की बात बताई गई थी.
बैंक खाते की विस्तृत जांच में पता चला कि 5 जनवरी से 8 मई के बीच इस खाते से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर की गई जांच में इस खाते से जुड़े 16 साइबर धोखाधड़ी मामलों की जानकारी मिली. इनमें से 15 मामलों में पीड़ितों से ठगी गई रकम सबसे पहले इसी खाते में जमा कराई गई थी.पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. मामले में नामजद अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है.