देहरादून: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. देवभूमि उत्तराखंड, जिसे भगवान शिव की भूमि भी कहा जाता है, यहां स्थित कई प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं. सावन में इन मंदिरों में जलाभिषेक और विशेष पूजा के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
बागेश्वर जिले में स्थित बैजनाथ मंदिर उत्तराखंड के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है. गोमती और गरुड़ गंगा के संगम पर स्थित यह मंदिर समूह कत्यूरी काल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इसका प्राचीन नाम वैद्यनाथ था. यहां भगवान शिव की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है.
हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था और माता सती ने अपमान से आहत होकर यज्ञ अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे. सावन के दौरान यहां जलाभिषेक के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
रुद्रप्रयाग जिले का त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है. धार्मिक मान्यता है कि यहां तीन युगों से अखंड अग्नि प्रज्वलित है, जिसे शिव और पार्वती के विवाह की साक्षी माना जाता है. इस पवित्र अग्नि के दर्शन के लिए सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम को उत्तराखंड का पांचवां धाम भी कहा जाता है. यह प्राचीन मंदिर समूह भगवान शिव को समर्पित है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण, शिव पुराण तथा लिंग पुराण में मिलता है. सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
ऋषिकेश के पास स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर भी शिव भक्तों की प्रमुख आस्था का केंद्र है. पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष ग्रहण करने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर तप किया था, जिसके बाद वे नीलकंठ कहलाए. सावन में यहां कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
उत्तराखंड के ये सभी प्राचीन शिव मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र ही नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. सावन के दौरान यहां विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, भजन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है.