नई दिल्ली: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है. इसके साथ ही सरकार स्कूल की कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या की सीमा तय करने की भी तैयारी कर रही है. मेलोनी ने यह घोषणा 20 सितंबर को रोम में अपनी पार्टी के युवा संगठन के कार्यक्रम में की. हालांकि, अभी यह नियम लागू नहीं हुआ है. सरकार प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखेगी और कानून बनने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी.
मेलोनी सरकार का प्रस्ताव केवल बुर्का और नकाब तक सीमित नहीं है. इसके तहत एक कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या के लिए भी अधिकतम सीमा तय की जा सकती है. हालांकि, यह सीमा कितनी होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इटली के स्कूलों में करीब 11.6 प्रतिशत छात्र नॉन-इटैलियन हैं. सरकार का कहना है कि भाषा और स्कूल व्यवस्था में बेहतर तालमेल के लिए इंटीग्रेशन पर ध्यान देना जरूरी है.
मेलोनी ने यह भी कहा है कि जिन विदेशी छात्रों को इटली की शिक्षा व्यवस्था को समझने में परेशानी हो रही है, उनके माता-पिता के लिए इटैलियन लैंग्वेज क्लासेज लेना जरूरी है. उनका कहना है कि इटली में रहने और भविष्य बनाने वाले लोगों को देश की भाषा, संस्कृति और नियमों को समझना चाहिए.
इटली में चेहरा ढकने को लेकर पहले से सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियम मौजूद हैं. 2008 में इटली की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत ने कहा था कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से चेहरे को ढकना कुछ परिस्थितियों में उचित कारण माना जा सकता है. हालांकि, पहचान की जरूरत पड़ने पर चेहरा दिखाना जरूरी हो सकता है.
मेलोनी की यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब इटली में अगले साल आम चुनाव प्रस्तावित हैं. इटली की राजनीति में अप्रवासन और एकीकरण लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं. 2022 के चुनाव से पहले किए गए एक सर्वे में दक्षिणपंथी मतदाताओं के बीच इमिग्रेशन को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया था. इस प्रस्ताव के बाद इटली में धर्म, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अप्रवासन और स्कूलों में एकीकरण को लेकर बहस तेज होने की संभावना है.