ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर आर्थिक आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत से जून के अंत के बीच देश की GDP एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 10.1 फीसदी कम रही.
यह फारसी कैलेंडर की पहली तिमाही का आंकड़ा है, जिस दौरान ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष में था. IMF के जुलाई 2026 के अनुमान के मुताबिक, पूरे 2026 में ईरान की वास्तविक GDP में 5.4 फीसदी संकुचन हो सकता है.
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से तेल और गैस निर्यात पर काफी निर्भर रही है. ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंध और होर्मुज स्ट्रेट में घटती जहाजों की आवाजाही उसके लिए बड़ा झटका साबित हुई है. रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी दबाव और नाकाबंदी के बीच ईरान का तेल निर्यात तेजी से प्रभावित हुआ है. सितंबर की एक रिपोर्ट में ईरान के तेल निर्यात के करीब 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिरने की जानकारी दी गई थी.
होर्मुज स्ट्रेट में भी व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे है. रॉयटर्स के मुताबिक, सितंबर के तीसरे सप्ताह के दौरान एक सप्ताहांत में केवल 12 कमोडिटी जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि संघर्ष से पहले यहां रोजाना करीब 125 जहाज गुजरते थे.
ईरान में महंगाई की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है. IMF ने 2026 के लिए देश की औसत उपभोक्ता महंगाई 68.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में ईरान की महंगाई करीब 69 फीसदी रही और सालाना आधार पर उपभोक्ता कीमतों में 84 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. कमजोर होती मुद्रा ने स्थिति को और मुश्किल बनाया है. इसके मुकाबले भारत की अगस्त 2026 की खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी रही.
महंगाई और कच्चे माल की उपलब्धता में कमी का असर ईरान के औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है. अगस्त में PMI 50 से नीचे रहा, जो आर्थिक गतिविधियों में संकुचन का संकेत देता है. कच्चे माल की लागत बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने से कंपनियों के सामने उत्पादन घटाने की चुनौती बढ़ सकती है.