अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी टकराव को लेकर कहा है कि वह अब निर्णय लेने की स्थिति में हैं. एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान अमेरिकी शर्तों के अनुरूप व्यवहार नहीं करता है तो आने वाले समय में बड़ा घटनाक्रम हो सकता है.
ट्रंप ने ईरान से निपटने के लिए सैन्य कार्रवाई, आर्थिक दबाव और बातचीत जैसे विकल्पों का जिक्र किया. साथ ही उन्होंने कहा कि वह ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे हैं. यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हो सकती है.
दूसरी तरफ तेहरान ने कतर के माध्यम से वॉशिंगटन तक बातचीत दोबारा शुरू करने की शर्तें पहुंचाई हैं. ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक, अमेरिका को सात शर्तों से अवगत कराया गया है और अब तेहरान अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा है. सार्वजनिक रूप से सामने आई प्रमुख मांगों में सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना, विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना शामिल है. ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि मांगें स्वीकार नहीं होने की स्थिति में वह संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है.
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य भी अमेरिका-ईरान टकराव का अहम केंद्र बना हुआ है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 20 सितंबर तक उसकी सेनाओं ने नाकेबंदी के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला है. अमेरिका ने जुलाई में ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री यातायात पर नाकेबंदी फिर से लागू की थी. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. मौजूदा तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सप्ताहांत में इस मार्ग से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या पिछले सप्ताह की तुलना में काफी कम रही.
अमेरिका की ओर से सैन्य और आर्थिक दबाव के संकेतों के साथ कूटनीतिक बातचीत की संभावना भी बनी हुई है. वहीं, ईरान ने बातचीत के लिए अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं और होर्मुज को लेकर भी रुख सख्त रखा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच आगे की दिशा वॉशिंगटन के जवाब और तेहरान की अगली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी.